GRAHAN KAND

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Printed
GRAHAN KAND
Code: SPCL-2270-H
Pages: 80
ISBN: 9789332413948
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Anupam Sinha, Jolly Sinha
Penciler: Anupam Sinha, Lalit Sharma
Inker: Vinod Kumar
Colorist: Nagendra Pal, Vishwajaya Ghosh,
Rs. 60.00
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Reviews

Saturday, 04 October 2014
the second part of nagayan series grahan kand STORY OF GRAHAN KAND Nagraj,dhruv aur vispi nagdweep se mahanagar ki taraf prasthan karte hai.unhe mahagrahen se pahle mahanagar me pravesh karna hai.kintu nagina,gurudev aur krurpasa unhe mahanagar na photchne dene ke liye krit sankalpa hai.ve unhe mahagrahen me he rokne ke liye kayi badaye kadai karte hai.kintu dono virr yodha har badha ko moh tode jawab dete huae annte mahanagar tak pohotche hi jate hai kintu unka mahanagar me pravesh hota hai mahagrahen ki avdhi ke hi doran.jiske karan navvivahit jode par lag gaya hai asobhe gadi ka abhisap.isi ke sathe dada vedacharye bhi nagraj se kafa hai kukhi nagraj pahle hi kar chuka hai unke poti bharti se shadi.kintu bati ko nagraj ke vispi se vivah se koyi aapti nahi hoti.vah dono ka mahanagar me swagat karti hai.kintu vedacharya apani poti ke liye bhote dokhi hai.dokhi dhurv bhi hai khuki uski patni natasa usse alag hokar apne pita grand master robo ke sath rahna chahte hai.vo cort se apne bete rishi ki kastadi ka case ladti hai jise nagina vakil gina ke rop me jitva dete hai aur natasha dhurv ko chd jati hai.aab nagina gina ke rop me fir nikal padi hai vispi aur nagraj ko alag karne ke liye. ye thi story grahan kand ki agei ki kahani gari hai grahan kand me...........
RISHIT RISHIT
Wednesday, 30 July 2014
ग्रहण कांड महागाथा नागायण का दोस्सरा भाग है और अपने रोमांच विशेषकर स्वयंवर के दृश्यों में और अपने हलके हास्य पुट और नए किरदारों के आगमन के कारण ये कॉमिक्स अपनी पहले भाग से अच्छी बन कर आई है 1. लेखक अनुपम-जॉली जी द्वारा स्वयंवर के प्रारंभिक दृश्य में जब क्रूरपाषा से आदेश अनुसार खुद को 'आप ' कहकर सम्भोदित कहने पर जब गुरुदेव आप,चेले और तुम के व्याकरण और उच्चारण में उलझ कर भ्रमित होता है तो वो वाकई एक मज़बूत हास्य लेखन के रूप में उभर कर आता है. 2. स्वयंवर के दृश्य में जब नागराज अपने बल और ध्रुव कि बुद्धि के बल पर स्वयंवर कि परीक्षा को पास करता है वो वाकई में पूरी कॉमिक्स का सबसे अच्छा और मज़बूत दृश्य बना है. 3. ध्रुव का कालदूत के समक्ष विवाह संबधी समस्त शर्तो को पूरा करने के बाद विसर्पी की विदाई के लिए अडिग रहना लेखन द्वारा भारतीय वर पक्ष के गर्वीले और अभिमानपूर्ण स्वभाव को चित्रित करता है. 4. महानगर यात्रा से पहले बाबा गोरखनाथ जी का ग्रहण के प्रति भय आने वाले संकट कि भयावहता को रोमांचक रूप से दिखता है लेकिन फिर भी वो संकट उतना भयावह दुर्भाग्य से बन न सका. 5 . भले ही शिकांगी का रोल बहुत विस्तार से नहीं दिखाया गया लेकिन वनपुत्र के रूप में कॉमिक्स और गाथा को एक बेहद अहम और मज़बूत किरदार मिला और उसका अपने साथियो को महानगर जल्द पहुचने का यात्रा मार्ग भी बेहद नवीन और रुचिकर तरीके से दिखाया गया है और पेज 54 में ग्रहण की विभिन्न अवस्थाओ के समक्ष विभिन्न किरदारों की यात्रा स्थिति को दिखाना अपने आप में बेहद सशक्त चित्रांकन साबित हुआ. 6. वेदाचार्य जैसे अनुभवी और गंभीर किरदार से ऐसी जोकरई की उम्मीद नहीं थी लेकिन फिर भी मनोरंजन कायदे से किया उन्होंने। कुलमिलाकर ये कॉमिक्स स्वयंवर के अपने रोमांचक प्रतियोगिता और हास्य पुट के कारन नागायण कि अपनी पहली कॉमिक्स से बेहतर साबित हुई। 9 /10.
sachin dubey
Monday, 26 May 2014
the story continues in 2nd part this part is as awesome as the 1st part nagraj swayamvar jeet kr visarpi se shaadi kr use mahanagar le aata hai story mein suspence badhta ja rha hai artwork toh best hai hi must read by all
Kamal Satyani
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