SHARAN KAND

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SHARAN KAND
Code: SPCL-2290-H
Pages: 80
ISBN: 9789332414143
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Anupam Sinha, Jolly Sinha
Penciler: Anupam Sinha
Inker: Vinod Kumar
Colorist: Nagendra Pal, Vishwajaya Ghosh,
Rs. 75.00
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Reviews

Tuesday, 28 October 2014
Nagraj aur scd nikal padte hai vispi ko bachne ke liye . Great story and artwork.
RISHIT RISHIT
Sunday, 14 September 2014
शरण कांड ठीक नाग्पाषा द्वारा विसर्पी के अपहरण से शुरू होता है और इसकी पूरी कथा लगभग नागराज और ध्रुव के विसर्पी को ढूँढने के प्रयासों के आस-पास ही घूमती है,इसबार कम से कम ध्रुव के सन्दर्भ में अच्छे एक्शन दृश्य लिखे और रचे गए हैं. 1.कॉमिक्स में बाबा गोरखनाथ का धनंजय द्वारा विसर्पी की खोज को `असंभव' के उत्तर में शिकांगी से कहना "क्या तुम्हे `असंभव' का अर्थ पता है"? और शिकांगी द्वारा "नहीं गुरुदेव" बोलना अपने आप में बेहतरीन दृश्य लिखा गया है| 2.कॉमिक्स के रंग-दृश्य प्रभाव थोड़े धीमे और मध्यम रहे जिससे एक्शन के चित्रांकन में उतनी चपलता नहीं महसूस हो पाई लेकिन संवाद के दृश्यों के अनुसार ये इफेक्ट्स एकदम उपयुर्क्त रहे| 3.शिकांगी और नागपाशा के युद्ध की जितनी भूमिका बंधी गयी उतना रोमांचक मुकाबला देखने को मिला नहीं और द्वन्द युद्ध में शिकांगी जैसी शक्ति का एकदम से परास्त होना कुछ अटपटा सा लगा इसी प्रकार नागराज और येतियो की भिड़ंत भी उम्मीद से कमतर ही निकली. 4.ध्रुव और मशीनी यंत्र के बीच के संवाद रोचक रहे और लेखक ने एकदम सही समय सीमा में ध्रुव द्वारा ब्लैक बिल्डर की हार दिखाई क्यूंकि इस लड़ाई को ध्रुव ने अपनी बुद्धि से जीता न की ताक़त से तो भले ही लोग कहे की ये ध्रुव और ब्लैक बिल्डर की लड़ाई जल्दी ख़त्म हो गयी लेकिन इसका लेखन एकदम सटीक रहा| 5.मुझे नागायण श्रृंखला की एक कमी दिखी की इसमें ध्रुव को इतना भावुक नहीं दिखाया गया है जितना की वो है जैसे पहली कॉमिक्स में नागराज को कोमा में देख और ग्रहण काण्ड में वनपुत्र की मृत्यु पर ध्रुव ने उतना भावुकतापूर्ण व्यवहार नहीं किया जिसकी उम्मीद थी. कुलमिलाकर कॉमिक्स औसत से ऊपर रही 7.5/10
sachin dubey
Monday, 26 May 2014
story continues from haran kand nagraj aur dhruva dono visarpi ko dhundhne mein lag jaate hai story bohot hi achchi hai artwork bhi great hai must read
Kamal Satyani
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