BANKELAL DIGEST 1

Email
Printed
BANKELAL DIGEST 1
Code: DGST-0054-H
Pages: 192
ISBN: 9789332418332
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Papindar Juneja, Raja, Tarun Kum
Penciler: Bedi
Inker: Bedi
Colorist: N/A
Rs. 150.00
Add to wish list
Description बांकेलाल का कमाल# 89: एक गरीब किसान ननकू और उसकी पत्नी गुलाबवती के घर शिव के आशीर्वाद से पैदा हुआ अति शरारती बांकेलाल जो कर बैठा शिव के साथ ही शरारत जिसके फलस्वरूप उसे मिला एक अनोखा शाप कि वो जिसका भी बुरा करेगा उसका हो जाएगा भला। शाप ने अपना कमाल दिखाया और बांकेलाल का यश जा पहुंचा महाराज विक्रमसिंह के कानों तक और उन्होंने मंत्री धर्मसिंह के हाथों बांकेलाल को ससम्मान महल बुलवा भेजा। मगर धूर्त बांकेलाल ने मंत्री धर्मसिंह को ही बना दिया अपने षड्यंत्रों का निशाना। कर बुरा हो भला #90: उधमपुर के राजा उधमसिंह ने विशालगढ़ पर कर दिया आक्रमण। उसके पास थी विक्रमसिंह के मुकाबले दुगनी तिगुनी सेना। बांकेलाल की हालत तो युद्ध का नाम सुनते ही खराब होने लगी तो बांकेलाल ने इस युद्ध के जंजाल से अपने आप को बचाने के लिये सभी सैनिकों के भोजन में मिला दिया जमालघोटा ताकि सैनिक युद्ध में जा ही ना सकें। फिर क्या हुआ? राजा विक्रम सिंह की हार हुई या जीत? राजकोष के लुटेरे # 128: राजकोष का लुटेरा डाकू सुल्तान सिंह कई राज्यों का राजकोष लूटता हुआ विशालगढ़ में जा पहुंचा। डाकू के भय से कई दूसरे राज्यों ने अपना खजाना राजा विक्रम सिंह के अति सुरक्षित राजकोष में रखवा दिया था। डाकू सुल्तान सिंह बांकेलाल की मदद से पूरा राजकोष ही लूट कर ले गया। राजा विक्रम सिंह ने डाकूओं के मददगार को फांसी देने का ऐलान किया तो उड़ गए बांकेलाल के होश। अब बांकेलाल कैसे बचेगा फांसी के फंदे से? बांकेलाल और यक्षकुमार # 142: राजकोष के लुटेरे सुल्तानसिंह का आतंक तो समाप्त हुआ परंतु उसके गुप्त अड्डे का कुछ पता नहीं चला। उसके द्वारा लूटे गए विशाल खजाने का पता अगर कोई लगा सकता था तो सिर्फ बांकेलाल क्योंकि डाकू उसका अपहरण कर अपने अड्डे पर ले गए थे। विशाल खजाने के लालच में बांके निकल पड़ता है उस खजाने की खोज में और जा फंसता है यक्षकुमार के चक्कर में। क्या बांके ढूंढ पाया खजाना? बांकेलाल और मुकद्दर का धनी # 144: विशालगढ़ में मचा था चोरों का आतंक। सारे नगरसेठ हो रहे थे तेजी से कंगाल। राजा विक्रमसिंह ने बांके को दिया चोरों का पकड़ने का जिम्मा। तब बांके ने बनाई विशालगढ़ से खिसकने की योजना। लेकिन चोर पकड़े गए और बांके कहलाया मुकद्दर का धनी। अभी वो संतोष की सांस भी नहीं ले पाया था कि विक्रम ने उसे भेज दिया शीतलगढ़ जहां की राजकुमारी को दस सींगों वाला राक्षस उठा ले गया। तो क्या वाकई बांकेलाल था मुकद्दर का धनी? बांकेलाल और शादी का षड्यंत्र # 148: बांकेलाल के दिमाग में जन्मी विक्रम को मारकर खुद राजा बनने की योजना। लेकिन कोई अंजान दुश्मन भी था विक्रमसिंह के खून का प्यासा। वो था राजा चंदनसिंह का गुप्तचर जो विक्रम को इसलिए मारना चाहता था क्योंकि विक्रम सिंह ने राजा चंदन सिंह की कुरूप पुत्री कुरूपलता से विवाह का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। जब बांके को इस रहस्य का पता चलता है तो वो रचता है ऐसा षड्यंत्र जिसमें विक्रम सिंह की मौत थी पक्की। तो क्या बांके का षड्यंत्र सफल हो पाया?
Bundled Collections that have this Comics

Reviews

Thursday, 30 October 2014
JAB BANKELAL SAMIL HOAA RC KI COMICS ME TO HOAA KAMAL.GREAT STORY AND ARTWORK.
RISHIT RISHIT
Monday, 24 February 2014
bankelal ka kamal aur kar bura ho bhala gajab comics hen.
yashpal
Thursday, 13 February 2014
super se oopar
Prince Jindal
More reviews