NAGRAJ DIGEST 6

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NAGRAJ DIGEST 6
Code: DGST-0055-H
Pages: 64
ISBN: 9789332418349
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Tarun Kumar Wahi
Penciler: Pratap Mulick, Chandu
Inker: N/A
Colorist: N/A
Rs. 40.00
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Description प्रलयंकारी मणि- #150:एक समुद्री तूफान में फंसे दो चोर राह भटक कर पहुंच जाते हैं इच्छाधारी नागों के द्वीप पर और वहां बचाते हैं नाग राजकुमारी विसर्पी की जान। नागों का राजा मणिराज उन्हें नागद्वीप पर स्थायी रूप से रहने की इजाजत दे देता है। परंतु इस उपकार के बदले वे शैतान कर लेते हैं नागद्वीप के नागों की इच्छाधारी शक्ति की स्रोत दिव्य मणि की चोरी और मणिराज की हत्या करके जा पहुंचते हैं जुर्म की दुनिया के बादशाह शंकर शहंशाह के पास। इसी के साथ पड़ती है एक गहरे षडयंत्र की नींव जिसका निशाना था नागराज। शंकर शहंशाह- # 151: इच्छाधारी नागों के द्वीप नागद्वीप से उनके शक्ति के श्रोत दिव्य मणि की चोरी कर दो चोर उसका सौदा करते हैं जुर्म की दुनिया के बादशाह शंकर शहंशाह के साथ| उस दिव्य मणि की खोज में नागद्वीप का राजकुमार विषप्रिय पहुंचता है मुम्बई और जा फंसता है शंकर शहंशाह के जाल में| तब शंकर शहंशाह उसकी मजबूरी का फायदा उठाते हुए चलता है एक चाल जिसके कारण नागराज की नाग-शक्तियां उसके शरीर से निकल जाती हैं और वो हो जाता है असहाय|
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Reviews

Thursday, 25 September 2014
The only collection where Nagraaj is missing till the last page. Very good read, and is nostalgia.
Vishal Bakhai
Monday, 10 February 2014
classic artwork. classic storytelling. it feels like i'm watching a movie. especially reading the two parts one after the other at the same time really takes you back to the old times. Pralayankari Mani may be the only Nagraj comic(apart from Infected) in which there is NO nagraj...except,on the last page.but still its a great comic. and Shankar Shahenshah is even better than that. must read!
Anubhav Dimri
Saturday, 08 February 2014
Shankar Shahanshah is the best out of two in terms of story & both comics are great in terms of artwork. A classic one.
Rajal Sharma
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