BANKELAL DIGEST 2

Email
Printed
BANKELAL DIGEST 2
Code: DGST-0059-H
Pages: 192
ISBN: 9789332418387
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Tarun Kumar Wahi
Penciler: Bedi
Inker: N/A
Colorist: N/A
Rs. 150.00
Add to wish list
Description स्वर्ग की मुसीबत #158 बांकेलाल की इकलोती इच्छा थी कि वह किसी देश का राजा बने। इसके लिये उसने कई तिकड़में भी लगायीं किंतु हर बार पासा उल्टा ही पड़ा। और राजा सिंहासन उसके हाथ आते आते रह गया। निराश होकर बांकेलाल जैसा खुराफाती इन्सान आत्महत्या करने पर हो गया उतारू। लेकिन उसके इस प्रयास से हो गई स्वर्ग के देवता की चड्डी गीली। क्योंकि बांके जैसा खुराफाती अगर समयपूर्व स्वर्ग आ जाए तो स्वर्ग का तो हो जाए बोलो राम। लेकिन बांके को सदा के लिए स्वर्ग में आने से रोकने के लिए आखिर देवताओं को उसे अल्पकाल के लिए सशरीर स्वर्ग में लाना ही पड़ा जहां बांके बन गया उनके लिए मुसीबत। पारस पत्थर #162: विशालगढ़ के राजा विक्रम सिंह प्रत्येक संध्या के समय गरीबों व बेसहारा लोगों के लिये अपने खजाने के स्वर्ण द्वार खोल देते थे। और उनकी देख रेख में प्रत्येक व्यक्ति को सेाना दान में दिया जाता। अब ये बात भला बांकेलाल से कैसे छुप सकती थी। आखिर राजा इतना सोना लाता कहां से है? शीघ्र ही उसे पता लगा उस पारस पत्थर का जिससे छुआने पर लोहा बदल जाता था सोने मे। बांकेलाल इतनी अनमोल वस्तु को कैसे छोड़ देता। वो पारस पत्थर ले भागा। लाश की तलाश #187: विशाल गढ़ के महामंत्री घर्मसिंह का हो गया खून। यही नहीं महामंत्री की लाश भी हो चुकी थी गायब। लाश की तलाश का कार्य सौंप दिया गया बांकेलाल को। और बांकेलाल ने इस मुसीबत से बचने के लिये महल में महामंत्री का भूत होने का प्रचार कर दिया। भूत के भय से मंत्री, दरबारी, राजा इत्यदि सब महल छोड़ कर भाग गए। तो क्या महामंत्री की तलाश पूर्ण हो सकी? खतरे का अवतार #191: बांकेलाल को राज खेत में हल चला कर बुआई का शुभारम्भ करने के लिये चुना गया किन्तु खेत मे हल चलाते समय उसे मिली एक बोतल जिसके टूटने पर उसमें से आजाद हो गया एक जिन्न जो सौ बरस पूर्व स्वयं पर हुए जुल्म का प्रतिशोघ विक्रम सिंह से लेना चाहता था। बांकेलाल को भला और क्या चाहिए था। उसने जिन्न की मदद से राजा विक्रम सिंह को बोतल में कैद करवा दिया और स्वयं विक्रम सिंह बनकर आ बैठा राजसिंहासन पर। और बन गया राजा। किन्तु उसे क्या पता था कि आज रात्रि ही विक्रम सिंह की मृत्यु भी होनी है। तो क्या मृत्यु अब बांकेलाल को अपने साथ ले जायेगी? चालीस चोर #195: विशालगढ़ के पडोसी राज्य में चोरों का आतंक फैल गया। राजा सूरजसिंह ने उन्हें पकड़ने के लिये राजा विक्रम सिंह की मदद मांगी। मदद के लिये निकला बांकेलाल फंस गया चालीस चोरों की गुफा में और अपने प्राण उनसे बचाने के लिये उसने सरदार को राजा सूरज सिंह की पुत्री चन्द्रमुखी के अपहरण के बदले राजखजाना प्राप्त करने की योजना बताई। बांकेलाल की मदद से चोर राजकुमारी का अपहरण कर ले गए लेकिन बांकेलाल की पोल खोल गई और अपनी जान बचाने के लिये इस बार उसने चली एक नई चाल। आखिर क्या थी नई चाल? परियों की मुसीबत #198: बांकेलाल को अपनी मदद के लिए विवश करने के लिए परीलोक की परियों ने कर लिया राजा विक्रम सिंह का अपहरण! अब बांकेलाल को और क्या चाहिए था! मुफ्त में ही उसका विक्रमसिंह से पीछा छूट गया था! लेकिन वाह री फूटी किस्मत बांकेलाल आखिर फंस ही गया परियों की मुसीबत में!
Bundled Collections that have this Comics

Reviews

Thursday, 30 October 2014
BANKELAL DIGEST COLLECTION.SWARG KI MUSIBAT IS THE BEST COMICS IN DIGEST.
RISHIT RISHIT
Saturday, 06 September 2014
Nice back to back issues. Loved the combo edition.
ravinder singh
Thursday, 13 February 2014
nice collection
Prince Jindal
More reviews