BANKELAL DIGEST 13

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BANKELAL DIGEST 13
Code: DGST-0082-H
Pages: 192
ISBN: 9789332418615
Language: HINDI
Colors: Four
Author: Tarun Kumar Wahi
Penciler: Bedi
Inker: N/A
Colorist: N/A
Rs. 120.00
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Description बांकेलाल और चमत्कारी जड़-0623 विशालगढ़ की तलाश में भटकते विक्रमसिंह और बांकेलाल को पता चला कि विशालगढ़ सात समुंदर पार है! वो विशालगढ़ पहुँचने के लिए एक जहाज पर सवार होकर निकले मगर बदनसीब बांके को जहाज वालों ने उठा कर समुद्र में फेंक दिया! डूबते को तिनके का सहारा होता है पर बांके को तो डूबने से बचने के लिए मिल गई कूड़े की पूरी जमीन ही! मगर जान बचा कर बांके जब नगर पहुंचा तो उसके साथ आ गई कूड़े की फ़ौज भी! क्या चक्कर था इन कूड़ों का? खुल जा सिम सिम-0630 विक्रमसिंह और बांकेलाल जा टकराए ऋषि लंगड़दीन से! और उनके श्राप से विक्रमसिंह बन गया एक अल्पविकसित बच्चे की तरह! फिर क्या हुआ? क्या बांकेलाल इस स्थिति का कोई लाभ उठा सका या हो गया फिर से टांय-टांय फिस्स! बांकेलाल और नागफनी-0639 बांकेलाल ने अंजाने में ले लिया ऋषि धतूरा से पंगा और फोड़ डी उनकी खोपड़ी! ऋषि ने क्रोधित होकर दे डाला शाप जिसके कारण बांके बन गया ऐसा भुक्कड़ जिसकी भूख सारे नगर का अनाज खाकर भी खत्म नहीं हो पा रही थी! तब वहां के राजा ने बांके को फिंकवा दिया कैकटा वन में जहाँ खाने के नाम पर सिर्फ कंटीली पत्तियां थीं! तो अब बेचारा बांके अपनी भूख कैसे मिटाएगा? यो जो है बांकेलाल-0665 विशालगढ़ की तलाश में भटकते विक्रमसिंह और बांकेलाल पांच समुद्र पार कर जा पहुंचे गुलिस्तान जहां के राजा ढालसिंह के सुपुत्र तलवारसिंह से शादी करना चाहती है नकटी चुड़ैल! और जब बांकेलाल को जबरन इस मुसीबत को हल करने के लिए धकेल दिया गया तो खड़ी हो गई बांके की बोदी! तो आखिर क्या षड्यंत्र रचा बांके ने और क्या परिणाम निकला? वो मारा पापड़वाले को-0678 विशालगढ़ की तलाश में उड़नखटोले में बढ़े जा रहे विक्रमसिंह और बांकेलाल को दिखी स्वर्ग की सीढ़ी जो लटकाई गई थी ऋषि अत्याचार्य के लिए! परंतु विक्रम के स्पर्श से सीढ़ी हो गई गायब और उन दोनों को शाप के रूप में मिल गया अड़ंगा जो उनके हर काम में अड़ंगा लगाने को तैयार बैठा था! अब क्या होगा विक्रम और बांके का? दिल का चोर-0686 विशालगढ़ की तलाश में भटकते विक्रमसिंह और बांकेलाल के हाथ में गिरा एक दिल जोकि परलोक ग्रह की राजकुमारी दिलकश का था! उस दिल के पीछे पहुंचा जादूगर हडडल भी जो राजकुमारी से शादी करना चाहता था! बांके ने विक्रम को दिल के साथ कर दिया रवाना और जादूगर हडडल को भेज दिया विक्रम के पीछे! अब क्या होगा मोटे विक्रम का?
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Reviews

Saturday, 06 September 2014
Classic, cool and awesome. Love the book!
ravinder singh
Friday, 07 February 2014
vishaalgadh ki khoj abhi bhi jaari hai... Bankelal bhatakte huve jaha bhi ja raha hai... apni khurafhati harkato se hame hasa raha hai... sabhi kahainya mazedaar hai aur artwork bhi achcha hai.
PREM YADAV
Thursday, 06 February 2014
bankelal ka ek hansi ka fawwraa... mast comedy comics
Shoaib Khan
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