BANKELAL DIGEST 15

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BANKELAL DIGEST 15
Code: DGST-0088-H
Pages: 192
ISBN: 9789332418677
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Tarun Kumar Wahi
Penciler: Bedi
Inker: Bedi
Colorist: N/A
Rs. 120.00
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Description बांकेलाल और मुक्कालात-721 विशालगढ़ से कामचोरी और बेरोजगारी दूर करने के लिए राजदरबार में छिड़ी बहस! और इस मौके का फायदा उठा कर बांकेलाल ने महल को बना दिया साधू, सन्यासियों और भिखारियों के लिए रैन बसेरा! और इसी बीच भविष्य के अजनबी ग्रह से आए मुक्कालात और उसके साथी जो ढूंढ रहे थे भविष्य में उनके लिए खतरा बनने वालों को जोकि थे सन्यासी और भिखारी! अब क्या होगा इस उठापटक का अंजाम? मैं हूँ बांकेलाल-726 लेखक : तरुण कुमार वाही, चित्रांकन : बेदी, संपादक : मनीष गुप्ता सपरिवार शिकार पर गए विक्रमसिंह का पजामा उड़ गया और जा पहुंचा राजा सनकीसिंह के महल पर! बस फिर क्या था सनकीसिंह ने कर दिया आक्रमण! वहीं दूसरी तरफ एक ऋषि कन्या की रक्षा के कारण बांकेलाल को मिली एक मुद्रिका जो उसके शत्रु को पहनाने पर अमावस की रात वो डूब मरता! अब क्या होगा राजा विक्रमसिंह का? मैं नहीं सुधरूँगा-731 महल में आया एक वैज्ञानिक एंवई जिसके अविष्कार तेरी फूं की मदद से दूर बैठे किसी से भी बात हो सकती थी! जल्दी ही तेरी फूं का जाल पूरे महल में फैला दिया गया! बांकेलाल ने उठाया इस मौके का फायदा और महारानी पर डालने लगा डोरे! परंतु तेरी फूं के लिए मिले इनाम को देख कर एंवई एंवई ही मर गया और उसकी अस्थि विसर्जन के लिए गए बांके को मिल गया वस्त्रविहीन दिखने का श्राप! फिर क्या हुआ? करवा चौथ-734 करवा चौथ के दिन महल के सारे कर्मचारी चले गए छुट्टी पर! इसलिए मजबूरन विक्रम को करने पड़ रहे थे महल के सारे घरेलु काम! और उसी दिन पहुंच गए स्वर्णलता के सात भाई यानी विक्रम के सात साले और फिर उनकी खातिरदारी के चक्कर में विक्रम की हालत हो गई खराब! इसी बीच बांके को वन में एक ऋषि से मिली अंगूठी जिससे शेर हो गए उसके गुलाम और उसके साथ चल पड़े विक्रम की टिक्का बोटी करने को! तो क्या स्वर्णलता का करवा चौथ पूरा हो पाया! अब आएगा मजा-741 प्रबंधमंत्री के दूर का रिश्तेदार तमीज चाचा अपनी सात बेटियां लेकर विशालगढ़ आया जिसका रिश्ता अपने सालों के साथ करने का वचन विक्रम ने दे दिया! दूसरी तरफ स्वर्णलता ने बांकेलाल को दी जबान की वो अपने भाईयों का विवाह ऋषि लटकाचार्य की सातों पुत्रियों के साथ करेगी! बरात सज गई पर अब किसके घर जायेगी बरात? लोहड़ी-746 महल में मनाया जा रहा था लोहड़ी का त्यौहार! सभी मस्त होकर भांगड़ा कर रहे थे! भांगड़ा की मस्ती और सोमरस के नशे में धुत राजा विक्रमसिंह को बांकेलाल ले गया रंगशाला और रानी को उसके खिलाफ भडका दिया! रानी स्वर्णलता अब उग्र रूप धारण कर निकल पड़ी विक्रमसिंह को भांगड़ा नचाने!
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Reviews

Saturday, 06 September 2014
Classic, cool and awesome. Love the book!
ravinder singh
Tuesday, 25 February 2014
waise bankelal ki story to hoti hi h best . Comdy.. Waise is digest me mujhe or bhi jada maza aay haste haste lotpot ho gaya. Best story and good artwork
Karan Singh
Thursday, 13 February 2014
Must have & must read
Prince Jindal
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