BHERIYA DIGEST 3

Email
Printed
BHERIYA DIGEST 3
Code: DGST-0089-H
Pages: 128
ISBN: 9789332421172
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Tarun Kumar Wahi, Dheeraj Verma
Penciler: Dheeraj Verma
Inker: Rajendra Dhoni
Colorist: N/A
Rs. 100.00
Add to wish list
Description भेड़िया कौन-0627 लेखक : तरुण कुमार वाही, चित्रांकन : धीरज वर्मा, स्याही : राजेन्द्र धोनी, संपादक : मनीष गुप्ता, प्रकाशन वर्ष : 1995 भेड़िया ने की एक मंत्री घिजिंग की हत्या और कर दिया जंगल में मानवों का प्रवेश वर्जित का ऐलान ! जिसने भी रखा जंगल में कदम उसे मिली विभीत्स मौत! इस नरसंहार को रोकने आया नागराज और जा टकराया एक के बाद एक तीन भेड़िया से! अब नागराज के लिए भी ये अबूझ पहेली है कि इनमें से असली भेड़िया है कौन? भेड़िया की खोज-0637 लेखक : मीनू वाही, चित्रांकन : धीरज वर्मा, स्याही : राजेन्द्र धोनी, संपादक : मनीष गुप्ता, प्रकाशन वर्ष : 1995 भेड़िया ने किया जंगल में मानवों का प्रवेश वर्जित और मचाया नरसंहार! उसे रोकने आया नागराज और आ टकराया एक के बाद एक यांत्रिक भेड़ियों से! तब फुजो असली भेड़िया की तलाश में जा पहुंचा राजनगर जहां भेड़िया ने मचा दिया था मौत का आतंक! और उसके सामने था राजनगर का रक्षक सुपर कमांडो ध्रुव! क्या राजनगर में हो पाएगी भेड़िया की खोज! मैं हूं भेड़िया-0056 लेखक : तरुण कुमार वाही, धीरज वर्मा, चित्रांकन : धीरज वर्मा, स्याही : राजेन्द्र धोनी, संपादक : मनीष गुप्ता, प्रकाशन वर्ष : 1995 मुम्बई से दिल्ली जा रही सुपर फास्ट एक्सप्रेस को किया गया हाईजेक जिसमें अवैध रूप से भेजा जा रहा था जंगली जानवरों को! इनको रोकने आए डोगा और परमाणु और उनका सामना हुआ दो भेड़ियों से! अब इनमें से असली-नकली की पहचान करना मुश्किल है क्योंकि दोनों ही कह रहे हैं कि मैं हूं भेड़िया! मैं हूं भेड़िया (संयुक्त संस्करण) भेड़िया ने किया जंगल में मानवों का प्रवेश वर्जित. जिसने भी रखा जंगल में कदम उसे मिली विभीत्स मौत. खुनी पंजों और तीखे दांतों ने खूब मचाया नरसंहार. उसके इस नरसंहार को रोकने आए नागराज, ध्रुव, डोगा और परमाणु. लेकिन चारों का ही सामना हुआ चार अलग-अलग भेड़िया से. क्या था यह रहस्य जिसने चकरा कर रख दिया चारों ही महा नायकों का दीमाग? असम के वनों से राजनगर तक हर जुबान पर था एक ही सवाल कि ‘भेड़िया कौन’? चारों दिशाओं में हो रही थी ‘भेड़िया की खोज’. चप्पे-चप्पे में फैल चुकी थी मौत की सनसनी और हर तरफ गूँज रहा था एक ही कोहराम कि ‘मैं हूं भेड़िया’.
Bundled Collections that have this Comics

Reviews

Tuesday, 07 October 2014
G... 'Jungle Ki Aazadi Par Kala Dhabba Hai Ye Chidiyaghar! Janwar Insano Ke Manoranjan Ki Vastu Nahi.'- Bheriya I like all three stories n' this dialog is my most favo in this series n' I'm totally agree with that. Humans must not enter in Jungle... for the security of animals n' it's nature. It doesn't matter how much we need Jungles but if humans enter... they will only n' ONLY cause destruction. Bheriya's birth is a lesson that if 'Dharti ki Santano' se unka adhikar cheena jaayega to Bheriya jaise Jungle ke Jallaad awashya paida honge. BTW this is a must read series not only for RC fans but also for those who believes in Actions, Creativity, Suspenses, Scerets n' all these kinda stuffs. Nagraj vs Bheriya, SCD vs Bheriya, Doga n' Parmanu vs Bheriya, Bheriya vs so many other bheriyas... total action total destrution. Bheriya is one of my most favo superhero in RC universe. -Swapnil Doga Dubey-
Swapnil Dubey
Wednesday, 03 September 2014
I recently ordered the CE of this comics.Storyline was fine going by the ttimeline when it was written but artwork was very disappointing.It was patchy and below par.Hope it gets improved in next editions.
Indrashish Guha
Friday, 04 July 2014
3 कॉमिक्स की ये सीरीज 1994-1995 में आई थी जिसके रचियता धीरज जी थे. इस सीरीज में भेड़िया जंगल से गायब हो जाता है और कुछ नकली क्लोन भेड़िया उसके स्थान पर मानवो की हत्या कर रक्तपात मचाते हैं. इस सीरीज से जुड़े कुछ सकरात्मक और नकरात्मक पहलू. 1.भेड़िया कौन में नागराज का खजाना यात्रा के दौरान भेड़िया से टकराव बहुत अच्छा रहा और उसके एक्शन दृश्य भी अच्छे बने. लेखक द्वारा जंगली काबिले वासियों का शहर आकर विस्मित होना फिर भयभीत होना और फुजो का भेड़िया को पहचानना आदि काफी अच्छे दृश्य लिखे गए हैं. 2.भेड़िया की खोज में लेखिका मीनू वर्मा जी द्वारा मनुष्यों के प्रदूषण युक्त वाहन से एक ख़रगोश का कुचला जाना बेहद संवेदनशीलता से दिखाता है कि किस प्रकार मानव अपने स्वार्थ के लिए जंगलो की शांति और संतुलन को अपने मशीनी हाथो से कुचल रहा है. इस दृश्य में काफी गहराई थी. 3.भेड़िया की खोज में ध्रुव का भेड़िया के साथ फैक्ट्री और जू में स्टाइल से भरा जबरदस्त एक्शन दृश्य जिसमे धीरज जी ने बेहद संजीदगी से 'वेव प्रभाव' का इस्तेमाल कर ध्रुव के एक्शन दृश्यों को वायु कि तरह चपलता दी है. पेज 18 का 2-3 फ्रेम.फिर ध्रुव का अपनी बुद्धि और आस पास की वस्तुओं द्वारा भेड़िया को हराना. 4.धीरज जी की एक परंपरागत विशिष्ट शैली के तहत एक पेज की पृष्ठभूमि यानी बैकग्राउंड पर उस कथा के मुख्य चरित्र कि पूरी तस्वीर उकेर के उसके आस पास छोटे फ्रेमो की रचना करना जैसे 'भेड़िया की खोज' और 'मैं हूँ भेड़िया' का पेज नंबर 4.इससे चित्रांकन को आधारित संबल मिलता है. 5.परमाणु का अहम् रोल और उसका डोगा को उसकी क्रूरता के लिए भर्त्सना करना और अपनी सूझ समझ से अंत में असली भेड़िया को ढूँढना तो अपने आप में स्वयं एक मज़बूत लेखन का प्रमाण है. 6.रेलवे स्टेशन पर जानवरों, भेड़िया और परमाणु डोगा के ज़बरदस्त एक्शन दृश्य जिनमे चित्रकार ने ज़बरदस्त मार्शल आर्ट की युद्ध तकनीक और रणनीति कौशल का डोगा,ध्रुव और भेड़िया द्वारा काफी गज़ब उपयोग करवाया है. 7.कॉमिक्स के GLOSSY PAPER में होने से एक्शन का मज़ा दो गुना हो गया. नकरात्मक पहलु 1.लेखक द्वारा ये न बताना कि आखिर भेड़िया जैसे मज़बूत शक्सियत का अपहरण हुआ कैसे ? 2.पोचर किंग के किरदार को यूँ ही अधूरा छोड़ देना. 3.नागराज का किरदार उम्मीद से कम होना और थोड़ा सा कमज़ोर होना. ये सीरीज अपने आप में अदभुत है ,इसके एक्शन दृश्य गज़ब के हैं और अगर आप भेड़िया के प्रशंसक हैं तो इस कॉमिक्स को बिलकुल भी मत छोड़िये क्यूंकि GLOSSY PAPER से इस कॉमिक्स संस्करण का मज़ा दो गुना हो गया है. 9/10.
sachin dubey
More reviews