BANKELAL DIGEST 16

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BANKELAL DIGEST 16
Code: DGST-0091-H
Pages: 192
ISBN: 9789332422650
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Tarun Kumar Wahi
Penciler: Bedi
Inker: N/A
Colorist: N/A
Rs. 150.00
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Description फीकी खिचड़ी # 749 सक्रंति के पर्व सबको खाने को मिली खिचड़ी। लेकिन महाराज विक्रम सिंह को मिली फीकी खिचड़ी जिससे उनका स्वाद बिगड़ गया। और तब महाराज को पता चला नमक एवं गघों की समस्या के विषय में। कोई रातों रात क्षार क्षेत्र से सारा नमक चाट जाता था, और कोई था जो गघों की भी हत्याएं कर रहा था। राजा विक्रम सिंह ने बांकेलाल के साथ मिलकर संकट का पता लगाने का निश्चय किया जबकि हत्याएं चिन चिनाची पौलाकू को तलाश थी गोरखट की जिसके पेट की थैली में थी। गघूरी जो कस्तूरी जैसी होती है। और जिसके पास हो उसकी मनोकामना पूर्ण करती हो। तो क्या चिन चिनाची पोलाकू को मिल सकी गाघूरी? साल-गिरह # 756 अपनी शादी के साल-गिरह पर अपने सभी मंत्रियों और दरबारियों सहित विक्रमसिंह गोलगप्पे खाने को जाते हैं चटोरा चाट भंडार जहां एक ऋषि से पंगा लेकर उसका पेट किसी विशाल गोलगप्पे के समान फूल जाता है! शाप मुक्ति का एक ही तरीका था ऋषि की खोई पुत्री का मिल जाना! तब उस खोई पुत्री को खोजने निकल जाता है बांकेलाल! परंतु उसे ढूँढ कर लाने के बजाय वो ले आता है विशाल उकाबों की सेना को ताकि वो असहाय विक्रम को चट कर जाएं! क्या विक्रम बच सका? शेर का पंजा # 766 अपनी आदत से मजबूर विक्रमसिंह ने ले लिया फिर एक ऋषि से पंगा जिसके परिणामस्वरूप महल के सारे पुरुषों को स्त्री वेश में ही रहने का श्राप मिला! शाप मुक्ति का एक ही उपाय था यज्ञ में एक ऐसे सिंह के पंजे की आहुति जीपे लिखा हो मेरा बाप चोर है अन्यथा हो जानी थी विक्रम की मौत! परंतु बांकेलाल ने जानबूझ कर नकली सिंह का पंजा आहुति में डाल दिया! तो क्या इस बार सफल हुआ बांके का षड्यंत्र? बांसुरीवाला # 776 बांकेलाल को एक बड़ा ही भयंकर स्वप्न आया कि यदि उसने ऋषि लटकाचार्य की सातों पुत्रियों का विवाह नहीं करवाया तो उसका बहुत बुरा हश्र होगा। बांकेलाल कन्नी, हकली, लंगड़ी, गूंगी, भैंगी,, बाहरी, कुबड़ी बहनों अर्थात सत्तियों के घर पहुंचा और उनके लिये वर की तलाश आरम्भ करने का वचन दिया। एक बांसुरी वाले को पता लगा कि प्रबंघ मंत्री के रिश्ते के चाचा की सात बहनें महल में ही उपस्थित हैं तो वो वहां चला आया अपने सात पुत्रों का रिश्ता लेकर। किन्तु सात वरों की खोज में तो था बांकेलाल। तो क्या बांकेलाल को मिल गए थे। उन सत्तियों के विवाह हेतु सात वर? मैं नहीं छोडूंगा # 784 विशालगढ़ के मोटे महाराज विक्रमसिंह को सनक सवार हुई अश्वमेध यज्ञ करने की! बस फिर क्या था आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई! और तैयारी शुरू हो गई बांकेलाल की भी विक्रम के खिलाफ षड्यंत्र रचने की! यज्ञ के लिए उसने जानबूझ कर चुना नकली ऋषि! दुसरी तरफ देवी चुड़ैला को प्रसन्न कर एक राजा कंगालपति ने हासिल की शक्ति ताकि वो विशालगढ़ का खजाना लूट सके! आखिर क्या हुआ इस टकराव का अंजाम? लिखे जो खत तुझे # 789 मोहकसिंह की शरारत के कारण महल में सभी संतोषी माता के नाम एक दूसरे को 2000 पत्र लिखते हैं जिसके कारण महल में पत्र लिखने का असमाप्त सिलसिला शुरू हो जाता है! दूसरी तरफ डाकू झाड़िया जो हर राज्य में आकर लोगों की झाड़ू लूट लेता है आ पहुंचा था विशालगढ़! आखिर क्या हुआ इस उठापटक का परिणाम?
Bundled Collections that have this Comics

Reviews

Thursday, 31 July 2014
mindblowing stories
manoj
Friday, 11 July 2014
bas yahe kahoonga ke bahut he jabardast comics hai sare ke sare, ankh band kar ke khareed lo
Shubham Agrawal