BHOKAL DIGEST 3

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BHOKAL DIGEST 3
Code: DGST-0093-H
Pages: 224
ISBN: 9789332422674
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Sanjay Gupta
Penciler: Jaswant Singh Naar
Inker: N/A
Colorist: N/A
Rs. 200.00
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Description तुरीन-365 लेखक : संजय गुप्ता, चित्र : जसवंत सिंह नार, संपादक : मनीष गुप्ता ओसाक ग्रह के गद्दार सेनापति झडौदा ने चुरा लिया तुरीन का प्रहारा और जा छुपा खूंखारा के घने जंगलों में और प्रहारा की शक्ति से शक्तिशाली बन कर खूंखारा के खूंखार प्राणियों द्वारा विकास नगर पर खूनी हमले करने लगा! तब उसके आतंक के नाश के लिए निकल पड़े भोकाल, शुतान और तुरीन! क्या वो अपने प्रयास में सफल हो पाए? कपाला-370 लेखक : संजय गुप्ता, चित्र : जसवंत सिंह नार, संपादक : मनीष गुप्ता तुरीन और शुतान हो गए कपाला की शैतानी शक्तियों के शिकार! जिसका इलाज था मढोक का दूध वर्ना निकल जाते उनके प्राण! भोकाल निकल पड़ा मढोक का दूध लाने जहां उसका सामना हुआ एक से बढ़ कर एक खूंखार प्राणियों से! भोकाल के साथ कदम से कदम मिला कर उसका साथ देने चला आया मंत्र सम्राट तिल्ली भी! परंतु अंत में उनके सामने आ गई तुरीन की सबसे प्रिय बिल्ली कपाला अपनी शैतानी शकतियों के साथ! क्या भोकाल और तिल्ली इन सबसे बच सके? क्या वो मढोक का दूध ला पाए? जहरघाटी-382 लेखक : संजय गुप्ता, चित्र : जसवंत सिंह नार, संपादक : मनीष गुप्ता भोकाल और तिल्ली ने अपनी जान पे खेल कर मढोक का दूध हासिल किया ताकि बच सकें तुरीन और शुतान के प्राण! मगर उसे छीन ले गया झडौदा और छुपा दिया जहरघाटी में! अब अगर तुरीन और शुतान के प्राण बचाने हैं तो भोकाल और तिल्ली को जाना होगा जहरघाटी जहां से कोई जिंदा वापस नहीं आया! क्या भोकाल और तिल्ली जहरघाटी से ला पाए मढोक का दूध? शुतान की शादी-389 लेखक : संजय गुप्ता, चित्र : जसवंत सिंह नार, संपादक : मनीष गुप्ता एक बांसुरीवादक लड़की वेणु वृंदावनिया अपनी बांसुरी की मधुर सम्मोहक धुन पर बच्चों को चुरा लेती थी और उन्हें एक जादूगर के हवाले कर देती थी! शुतान ने देखी उसकी ये कारगुजारी, किंतु उसका खेल समाप्त करता करता बेचारा खुद ही फंस गया उसकी बांसुरी की मधुर धुन में! जिसकी इति हुई उसकी शादी से! आखिर क्या था ये गोरखधंधा? क्या हुआ बेचारे शुतान का? शैतान बुड्ढे-410 लेखक : संजय गुप्ता, चित्र : जसवंत सिंह नार, संपादक : मनीष गुप्ता भुजंगदेश में हंगामा मचा रखा था तीन शैतान बुड्ढों ने! उन्होंने पूरे राजपरिवार को भूमिगत नालों में दफन कर दिया जहां किस्म किस्म की मौत से जूझ रहे थे अतिक्रूर, पीकू, कपालफोड़ और राजा विषप्रिय! और भुजंगदेश पर हो गया था शैतान बुड्ढों का राज! जबकि इधर मित्र से मिलने आए भोकाल ने जब अपने मित्र और उसके परिजनों की ये दुर्दशा देखी तो उसका खून खौल गया! क्या भोकाल उनको उस मुसीबत से बचा पाया! क्या वो शैतान बुड्ढों का आतंक से निपट पाया? तीन चुड़ैलें-440 लेखक : संजय गुप्ता, चित्र : जसवंत सिंह नार, संपादक : मनीष गुप्ता विकासनगर में आतंक बन कर छ गईं तीन चुड़ैलें! उनके आतंक का दमन करने निकले भोकाल व तुरीन! किंतु तीन चुड़ैलों ने उन्हें भी अपनों में शामिल कर लिया! तुरीन को बना दिया चुड़ैल और भोकाल को बना दिया राक्षस! तंत्रा-455 लेखक : संजय गुप्ता, चित्र : जसवंत सिंह नार, संपादक : मनीष गुप्ता तीन चुड़ैलों के जादू में फंस कर भोकाल और तुरीन बन गए राक्षस और चुड़ैल! उन्होंने मचा दिया विकासनगर में मौत का आतंक! मगर शुतान ने जान पर खेल कर उन दोनों को सामान्य किया! मगर जो तबाही उन दोनों रक्षकों ने विकासनगर में मचाई थी उसकी एक ही सजा थी! पत्थर से मार मार कर जान निकाल देना! दोनों ने फैसला किया चाहे जो भी हो वो सजा भुगतेंगे! तो क्या राज्य के रखवालों का आखिरी अंजाम ऐसी दर्दनाक मौत था?
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Reviews

Friday, 24 October 2014
Mharavan ke bad maine ye comics shop se li.read krne ka bad esa lga kas ye series or jyada hoti to mja a jata jese mharavan main tha...pr koi bat nhi ye comics bhi bahot achi hai artwork or story bahot hi achi hai bus iske bare main itna khna cahunga old is gold...
jai viswas