Tuesday, October 21, 2014
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Mukti Hot

Story Attributes

Genre
Horror
Characters
Other
Status
Complete

हर बार ये जरूरी नहीं होता की किसी भूत या प्रेत से मुक्ति पायी जाए..कभी इनकी मदद भी करनी चहिये ताकि ये मुक्त हो जायें..ये भी सिर्फ उन्ही को डराती है जो इनसे डरते हैं...

लन्दन...नाम ही काफी है जगह बताने के लिए...ऐसे खूबसूरत जगह है की हर कोई वहाँ भले ही रह न पाए पर जाना जरूर चाहता है. पर क्या कोई सोच सकता है की ऐसी जगह पर भूतों का साया भी हो सकता है? भूत-प्रेत सिर्फ भारत में ही नही होते..हर जगह होते हैं..और लन्दन वैसे भी अपने भुतहा मेहेलों के लिए मशहूर है.

ऐसी ही एक महल जैसी इमारत हैं वहां...(काल्पनिक, हकीकत सिर्फ कहानी में.)..जहां पर जो कोई रहने आया, अगले दिन ही खून की उलटी करके मर गया. अगर वहाँ कोई बच्चा अपनी मम्मी को परेशां करता तो मम्मी बोलती –‘ज्यादा शैतानी करी तो उस महल में छोड़ अओउंगी’ और बच्चा डरकर अपने कमरे में चला जाता.

न जाने इतने सालों में भारत से एक परिवार आया..राठोड परिवार. मि. राठोड एक कंप्यूटर टेक कंपनी में काम करते थे..और उन्हें उनके काम से खुश होकर लन्दन ब्रांच में शिफ्ट किया था २ साल के लिए, तो परिवार भी साथ आ गया. वैसे तो उन्हें कंपनी की तरफ से फ्लैट मिल रहा आता पर उन को न जाने क्या सूझी की वो उस भूतहा इमारत में रहने चले गए. लोगों ने मना भी किया पर ये राठोड परिवार था, ऐसे कैसे पीछे हट जाये. वो प्रेक्टिकल लोग थे..इन चीजों में विश्वास नही करते थे.

हाह! शुरू में कोई नहीं करता..पर जब ‘वो’ तांडव मचाती है तब समझने लायक भी नही रहते!

इमारत के मालिक से बात हुई-

“देखिये सर, आप बात की गहराई को समझ नही रहे हैं..कम से कम अपने परिवार का तो ख्याल कीजिये. मेरे परिवार में भी अब सिर्फ मैं ही रह गया हू. मैं आपको बेवक़ूफ़ नही बना रहा..मैं वैसे भी अब इसमें नही रहता न मुझे कोई फायदा हो रहा है. मैं आपको सब बता दिया..आगे आपकी मर्ज़ी.”

“मिलर साहब, आप बहुत डरपोक हैं.वैसे तो मुझे नही लगता ऐसा कुछ इसमें होगा! अगर हुआ भी तो उसे पकड़ कर मयुजियम में रखवा दूँगा!”

उन्होंने पैसे जमा कर वाए और रहने चल दिए.

“अब आप लोग अपने घर जायें और हमें अपने हाल पर छोड़ दें.”

महल में पहले से ही एक बूढी नौकरानी रहती थी..कहते हैं सालों से वो यहाँ रह रही है पैर प्रेतात्मा ने उसे कुछ नही कहा. लेकिन उसने प्रेतामा का कहर बरसते देखा है. वो उन्हें कहानियाँ सुनाने लगी, पर किसी ने ध्यान नहीं दिया.

उनके परिवार में-

मिस्टर राजन राठोड, उनकी पत्नी श्वेता और २ बच्चे थे..एक राज १५ साल का..साइंस और रोबोट्स में काफी दिलचस्पी थी उसकी..और दूसरी बार्बी ...९ साल की छोटी सी प्यारी सी बच्ची..

उसके बाद एक दिन..श्वेता को रसोई में फर्श पर खून की कुछ बूंदें दिखाई दी...और वो भी ताज़ा. उसको घूरते देख नौकरानी बोल “आप परेशां मत होइए, ये खून का धब्बा बहुत पुराना है, आज तक नहीं मिटा है.” लेकिन वो बोली “नहीं! इस खून के धब्बे को साफ़ करना ही होगा..अच्छा नहीं लगता ये!”

श्वेता ने राज को बुलाया..राज ने कुछ साफ़ करने वाली एसिड्स और केमिकल और एक खुरचने का हथियार ले आया. और उसे खुरचने लगा. बुढिया नौकरानी ने बहुत मना किया पर वो नही माना.

तभी जोर से फर्श कापने लगा और बिजली चमक उठी. जिससे सभी फर्श पर गिर गए. नौकरानी जोर से चिल्लाई और पीछे देखते हुए भाग पड़ी..जिसके कारन आगे देख नही पायी और दरवाज़े से टकरा कर बेहोश हो गयी. थोड़ी देर बाद बुढिया को होश आया. राज और श्वेता पसीने से भीग रहे थे.

“देखा आप लोगों ने! मैंने मना किया था न..महल में रहना है तो यहाँ की चीज़ों से छेड़ छाड़ मत करना!”

“क्या बकती है बुढिया!..मेरे बेटे ने लगभग निशान मिटा ही दिया था...तुम डरो मत, वो जो कोई भी है हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पायेगा.”

पर चौंकाने वाली बात ये थी की शाम को वो धब्बा फिर से आ गया था. राज को गुस्सा आ गया..और फिर से उसे खुरचने लगा.

“मम्मी...येस....मैंने निशाँ मिटा दिया याहू....” राज खुशी में उचलता हुआ कुर्सी पर शान से बैठ गया. तभी वो अचानक थोडा सा ऊपर उठा और माथे के बल फर्श पर जा गिरा. उसके माथे से खून निकल रहा था. मम्मी झटके से उठी और उसके पास पहुँच गयी...

“अरे..कहाँ मर गयी बुढिया?...अरे कपडा ला...”

“ये लो...”

“हाँ...”मम्मी ने मुह उठाकर देखा तो वो सामने देखते ही घबराकर और पीछे गिर गयी..सामने एक कंकाल खड़ा था जिसकी आँखों में से लाल अंगारे निकल रहे थे. अचानक एक भयावह संगीत गूंजने लगा और वो कंकाल नाचने लगा. श्वेता की हालत खराब हो गयी...राज को ये सब देख कर डर भी लग रहा था और गुस्सा भी. वो सामने गया और म्यूजिक सिस्टम चालु कर दिया...तेज आवाज़ में.

अब प्रेत का संगीत धीमा पड़ गया..शायद वो उनके इस व्यवहार से अचंभित थी..वो श्वेता की ओर बढ़ी ही थी की किसी ने पीछे से उस पर कुर्सी मारी. कंकाल पीछे मुड़ा..राजन खड़ा था.

कंकाल बहुत ही भयानक लग रहा था...ऊपर से लाल आखें..राजन के नादर भी डर समां गया पर उसने व्यक्त नही किया.

“हम्म...तो तुम हो वो प्रेत आत्मा..जो सालों से यहाँ रह रही है. एक ही घर में इतने साल रहते रहते ऊब नही गयी तुम? शक्ल देखि है कभी आईने में? हा हा लगता है खून की कमी है? घरवाले कुछ खिलते नही हैं क्या?? ये लो..वाइटल फोर्स..शरीर की बैटरी चालू रखे २४ घंटे!, जब खत्म हो जाए बता देना मैं और मंगा दूँगा.”

उस के साथ ऐसा भद्दा मजाक किसी ने आज तक नही किया था..उसने गुस्से में वो शीशी हवा में उठा कर फोड दी. कंकाल ने उसे पकड़ना चाहा पर उसे हाथ लगाते ही वो काँप गयी..उसे कुछ समझ नहीं आया..और अपनी हार पर बडबडाती हुई महल के पीछे चली गयी.

प्रेतात्मा एक जगह बैठ कर सोच रही थी..अपनी पुरानी भयानक तबाही को..कैसे लोगों को उसने मारा था, कैसे लोग उसे देखते ही पागल, विक्षिप्त हो गए थे...पर ये लोग..ये लोग मुझसे डरने की बजाए मेरा मजाक बनाते हैं.

अब तो ये रोज की बात होती..वो कुछ डराने के लिए उनके साथ करती पर वो मजाक में टाल जाते...और रात को उसके मजाक के किस्से बनाते. ऐसा सिर्फ वो ही नही..बल्कि आस पास रहने वाले पडोसी भी किया करते थे..कुछ राजन की हिम्मत की दाद देते तो कुछ उसकी बेवकूफी कहते.

वैसे तो प्रेतात्मा उनकी बेटी बार्बी को ही खत्म कर देना चाहती थी पर न जाने क्यों उसे देखते ही उसके अंदर सहानुभूति जाग उठती. उसने सोचा की वो राजन और उसकी बीवी को जान से मार देगी ..पर तभी बार्बी का ख्याल आया उसे. ‘अरे वो तो एक दम शांत लड़की है उसने तो कभी मुझे परेशान भी नहीं किया. मैं उसे कुछ नहीं कहूँगी.’

एक दिन बहुत जोर से बारिश होने लगी, तेज हवाएं चल रही थी..लग रहा था कोई तूफ़ान आने वाला है.उधर प्रेतात्मा उनके कमरे की तरफ बढ़ी आ रही थी...किसी को कुछ पता नही चल रहा था. सबसे पहले वो राज के कमरे की तरफ मुडी..जैसे ही उसने दरवाज़े पर झाँका वो एक दम से पीछे हो गयी... दरवाज़े पर एक भयानक कंकाल खड़ा था..इतना भयानक की प्रेत की रूह भी काँप गयी..वो कंकाल उससे कई ज्यादा मजबूत था, और ऐसे खड़ा था जैसे अभी उसे दबोच लेगा. और वो डर कर वापिस चली गयी. वो सोचने लगी की महल में एक और प्रेतात्मा कहाँ से आ गयी? सालों से तो वो ही यहाँ राज कर रही थी..कोई बात नही सुबह देख लुंगी उसे.

प्रेतात्मा सुबह फिर से गयी..पर जो उसने नजारा देखा तो हँसे बिना न रह सकी..वो कंकाल एक दम बंद पड़ा था..आँखें बंद थीं..एक दम बेजान लग रहा था. तभी राज के बोलने की आवाज़ आई..

“पापा! कल कमाल हो गया..कल वो आत्मा फिर से आई थी..मैंने अपना स्केलेटन रोबो बाहर चालू करके रख दिया था..और उसको देख कर जो आत्मा की हालत हुई हाहहाहा”

ये सुनकर प्रेतात्मा गुस्से में जल गयी...इतना गन्दा मजाक किया गया उसके साथ! वो उन्हें सबक सिखाना चाहती थी..पर कोई आलोकिक शक्ति उनकी मदद कर रही थी.

पर अब वो शांत हो गयी थी...न ही कुछ गडबड करती न ही राठोड परिवार को परेशां करती. एक दिन बार्बी बगीचे में टहलते टहलते महल के पीछे चली गयी..वहाँ उसने देखा एक टुटा हुआ लकड़ी का छोटा सा घर था..वो उत्सुकतावश अंदर घुस तो गयी पर देखा की वो प्रेतात्मा वहीँ बैठी हुई थी..वो तुरंत वहां से बाहर जाने ही वाली थी की उसकी नज़र प्रेतात्मा की नज़र से मिल गयी..और वो उसके सम्मोहन में फंस गयी.

प्रेतात्मा ऐसे बैठी थी जैसे मानो की अब थक गयी हो...उसके चेहरे से किसी चीज़ की प्यास लग रही थी.

“तुम्हें बहुत तंग किया है न हम लोगो ने...?”

“हाह! मैं बूढा जरूर हो गया हू पर मेरी शक्तियां कमज़ोर नही हुई हैं, चाहू तो अभी तुम सबको मार दू..”

“बहुत गंदे हो तुम...तुमने अपनी बीवी को भी मार डाला था...उस नौकरानी ने बताया..”

वो गुस्से में आ गया..

“तुम नहीं जानती नादान लड़की..वो औरत..औरत कहलाने के लायक नही थी...उसे सिर्फ मेरे पैसों से मतलब था, मैंने आखिर उसे मार ही दिया और खुद आत्म हत्या कर बैठा. अब प्रेत बन कर घूम रहा हू, न तो नींद आती है, न भूख-प्यास...अजीब जगह पर फंस गया हूँ मैं. रिश्तों को देखते ही मन कसमसा जाता है मेरा”

“तो क्यों नही हो जाते तुम मुक्त?” बार्बी नादान थी प्रेत, मुक्ति, मोक्ष नहीं जानती थी वो.

“जानती हो एक बार यहाँ एक संत आया था उसने कहा था की जब यहाँ एक सुंदर, गोरी और भोली लड़की आएगी तभी ये जगह सुकून पा सकेगी..इसकी बेजानता खत्म होगी..और वो लड़की तुम ही हो..” प्रेतात्मा ने उसे चूमा, उसके शरीर में अजीब सी सिरहन दौड गयी.

तभी अचानक जमीन फट गयी और वो प्रेतात्मा उस लड़की को लेकर जमीन में समां गया. इधर श्वेता और राजन परेशान हो रहे थे...बार्बी कहीं नहीं मिल रही थी...श्वेता का रो-रो कर बुरा हाल हो रहा था. शाम हो गयी थी पर बार्बी का पता नहीं चला और न ही उस प्रेतात्मा का.

“खा गयी वो मेरी बच्ची को...खा गयी...मैं उसे नहीं छोडूंगी..”

“मम्मी...”

सबने पलटकर देखा..बार्बी हाथ में बॉक्स लेकर खड़ी थी..

“मम्मी..देखो उस प्रेतात्मा ने मुहे गिफ्ट दिया..और प्यार भी करा..वो इतना बुरा भी नहीं था.”

सब ने जब ये बात सुनी की वो प्रेतात्मा के पास थी सबके होश उड़ गए.

“अब कहाँ है वो?...”

“उसे मुक्ति मिल गयी पापा...उसे मुक्ति चहिये थी...अब वो कभी हमें परेशां नहीं करेगी.”

समाप्त

User reviews

Average user rating from: 3 user(s)

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Overall rating 
 
2.2
Plot 
 
1.5  (3)
Characterization 
 
2.3  (3)
Exposition 
 
2.7  (3)
 
Mukti 2012-11-29 18:11:02 Prabhat Singh
Overall rating 
 
1.0
Plot 
 
1.0
Characterization 
 
1.0
Exposition 
 
1.0
comicmonster Reviewed by comicmonster    November 29, 2012
Top 500 Reviewer  -   View all my reviews

MONSTER REVIEW

JUST ONE THING
CHEATING
IT IS AN ENGLISH TO HINDI TRANSLATION OF STORY 'LORD CANTERVILLE GHOST'

Mukti 2010-10-21 19:48:01 Saurabh Agrawal
Overall rating 
 
2.5
Plot 
 
1.5
Characterization 
 
2.0
Exposition 
 
4.0
skagrawal4k Reviewed by skagrawal4k    October 22, 2010
Top 50 Reviewer  -   View all my reviews

????confused???

mujhe samajh nahi aya ki ye comedy thi ya THS....kahin kahin par ye mujhe Amitabh Bachchan ki Bhoothnath ki yad dila rahi thi...bhoot darane ki koshish kar raha hai lekin log uska mazak uda rahe hain....

Mukti wala logic bhi kuch samajh nahi aya...aamtaur par mukti wali stories me ya to Aatma koi achcha kaam kar k mukt ho jati hai ya tab jab uski adhuri ichcha puri ho jati hai..ek bachchi se bat kar k pret mukt ho gaya??

Mukti 2010-07-26 08:21:48 Mohit Sharma
Overall rating 
 
3.0
Plot 
 
2.0
Characterization 
 
4.0
Exposition 
 
3.0
TRENDSTER Reviewed by TRENDSTER    July 26, 2010
Top 10 Reviewer  -   View all my reviews

Hello, Randhawa!

Tum fir se site par active ho gaye iski mujhe khushi hai. Ye story plot mujhe bahut simple laga aur ismey Thrill, Horror aur Suspense mey se kisi bhi element ka sahi isteymaal nahi tha. Baaton ka varnan achchha tha par is kahani mey tumhari baaki kahaniyon ki tarah maza nahi aaya.

 
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