Friday, October 31, 2014
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Story Attributes

Genre
Crime
Characters
Parmanu
Other Villains
Alpha, beta, gama
Status
Complete

परमाणु को मिल रहे हैं अपने पुराने बिछड़े रिश्ते...पर कोई और खेल रहा है अपना खेल इसके पीछे..

परमाणु को मिली हैं नयी शक्तियां...क्या वो उसकी कुछ मदद कर पाएंगी? या भावुक हो कर करेगा वो कुछ और फैसला...उसका एक गलत फैसला कर देगा दिल्ली को

ऑल क्लिअर

इंसानों की एक बहुत बड़ी कमजोरी होती है...रिश्ते ..जरूरी नहीं की रिश्ते खून के ही हों..वो प्यार, ममता और दोस्ती जैसे रिश्ते भी हो सकते हैं..और कुछ अनकहे रिश्ते भी होते हैं, जैसे परमाणु और दिल्ली का..इन दोनों का रिश्ता तो शायद परमाणु भी न बता पाय और न कोई और समझ पाए.

परमाणु को दिल्ली की छत ऐसे ही नहीं कहा जाता है. परमाणु ने कई बार छत बनकर दिल्ली को तबाही की बारिश से बचाया है. पर छत को भी समय समय पर परिवर्तन की जरुरत होती है ताकि वो आने वाले तूफानों, आंधी से बचाव कर सके.

दिल्ली अब दिल्ली नहीं रही है...रोज मर्डर, चोरी, रेप, लूट के किस्से बढते ही जा रहे हैं. गलती सिर्फ पुलिस वालों की ही नहीं है..आम आदमी की भी है जो वो आँखों के सामने हो रहे अपराध का विरोध नहीं करते. सिर्फ ये सोचकर की अगर हमने विरोध किया तो हम पिटेंगे! या हम मार दिए जायेंगे, या फिर रोज रोज पुलिस के चक्कर कौन लगाये?

शनिवार का दिन है, रात के १० बजे हैं, परमाणु..विनय के रूप में अपनी पुलिस की ड्यूटी से वापिस आ रहा था. दुकानें अभी भी खुली हुई है..चारों तरफ रौशनी हो रही है, दूर से कोई लड़का भागता हुआ आ रहा है...और विनय की जीप से टकरा गया. विनय अचानक ख्यालों से बाहर आया था पर टकराते टकराते उसने ब्रेक मार ही दी थी. विनय तुरंत बाहर उतरा, लड़के को ज्यादा चोट नहीं लगी थी, बस थोडा सा छिल गया था. लोगों ने भीड़ जमा कर दी.

“अरे ! देख कर नहीं चला सकते? दिखता नहीं है क्या?”

“पुलिस वाले हो तो मन मर्ज़ी करोगे क्या? दूसरों को बोलते हो परिवहन के नियम का पालन करो, खुद नहीं करते!”

विनय का मन तो हुआ की दोनों को एक-एक झापड रसीद दे. पर उसने अपना ध्यान वहाँ से हटा कर बच्चे को देखने में लगा दिया.

“क्या हुआ बेटा , ज्यादा तो नही लगी?”

“अंकल, अंकल मेरी दीदी को कुछ गुंडे परेशान कर रहे हैं और मेरी मम्मी से सारा सामान छीन लिया..सबुक,..”लड़का रोने लगा..उसे शायद अपनी चोट से ज्यादा अपनी माँ और अपनी दीदी की फ़िक्र थी...रिश्ते..

विनय ने सामने देखा...वो गुंडे अभी भी वहीँ थे..वो उठा और उनके पास चला गया.

“अरे..भाई साहब क्यों परेशान कर रहे हैं इन्हें?”

“तू कौन है बे? कबाब-में-हड्डी..पुलिस वालों को मैं जेब में लेकर घूमता हू ..जा घर जा अपने”

“जी..नही मेरी लम्बाई थोड़ी ज्यादा है...जेब मैं नही आ पाऊंगा..शायद आप मेरी जेब में आ सके..”

गुंडे को गुस्सा आ गया..और उसने जोर से एक थप्पड़ विनय के मुह पर मारा..और उसके मुह से खून आने लगा. वो दूसरा मुक्का भी मारने वाला था पर विनय ने उसका हाथ पकड़ लिया और मरोड़ दिया और साथ ही बाकी २ गुंडों को भी कसके लात मारी. इत्तेफाक की बात थी की वहीँ नाईट पेट्रोल्लिंग की कार भी जा रही थी ये सब देखकर वो भी मदद के लिए आ गए और गुंडों को बंदी बना कर ले गयी.

अब बोलने की बारी विनय की थी...

“तो आप लोग..यहाँ कोई सर्कस चल रहा था जो आप हाथ बंधे खड़े हुए थे? ये बच्चा भाग भाग का लोगों को बुला रहा था!..हाँ आप दोनों जरा बताए आप ने इनकी मदद क्यों नहीं की?”

“व..वो..अगर वो चाकू..गोली मार देते तो...”

“तो..क्या ...ज्यादा से ज्यादा आप मर ही तो जाते...”

“हैहं????”

“हाँ, अभी भी देर नहीं हुई है, जाइये चुल्लू भर पानी में डूब जाइये!”

“..अरे बड़े आराम से बोल रहे हो...हमारे घर में हमारा परिवार है...”

विनय को मौका मिल गया था...उसने एक थप्पड़ दे ही दिया उसे...

”तो ये किसी का परिवार नही हैं क्या???”

सब सर झुका कर खड़े हो गए..विनय ने आगे कुछ नहीं कहा और अपनी जीप में बैठ कर घर की और चल दिया.

घर पर विनय ने खाना खाया और सो गया. अगले दिन विनय की ड्यूटी शाम को थी.

अगले दिन रविवार को:

आज मौसम बड़ा अच्छा था..कई दिनों बाद आसमान में बदल आये थे और बरसात आने के आसार लग रहे थे. विनय के फोन की घंटी बज रही थी काफी देर से...फोन की आवाज़ से विनय की आँख खुली.

“हेलो!”

“विनय, मैं प्रोबोट बोल रहा हू ..जल्दी आओ तुम्हारे लिए एक खुश खबरी है...”

विनय तुरंत उठा, तैयार हुआ और पहुँच गया फ्यूजन चैम्बर में.

“क्या हुआ प्रोबोट? ऐसे सुबह सुबह...”

“सामने देखो विनय स्क्रीन पर...”

विनय ने सामने देखा ... उसके मामा जी यानि प्रोफ. के. के. थे..उनका एक विसुअल मेसेज आया था.

‘विनय बेटा..मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हू...जबसे मैं इस अपराध की दुनिया में आया , शुरु में तो सब कुछ अच्छा लगने लगा पैर बाद में कमी महसूस होने लगी..मैं भूल गया था की घर पर मेरा एक भांजा भी है जो मेरी राह देख रहा है,...,बेटा , पिछले हादसे से (परमात्मा सीरीज) से मेरी आँखें खुल गयी हैं..मैं तुम्हारे पास अब वापिस आ जाना चाहता हू...मुझे पता है तुम मुझे मेरी गलतियों के लिए माफ कर दोगे! पर तुम ये भी जानते हो की बुरा बनने में तो एक पल काफी है पर अच्छा बनना किसी तपस्या से कम नहीं...और तुमने मेरे इस फैसले से काफी खुश भी हो गए होंगे...’

विनय की आँखों में आंसू छलक आये थे.

‘पर यहाँ मेरे कुछ अपराधी दोस्त अब मेरे दुश्मन बन गए हैं...और इसी के चलते कभी कुछ भी हो सकता है..पर मैं कोशिश करूँगा जितनी जल्दी आ सकू..मेरा इन्तेज़ार करना!..और हाँ मैंने तुम्हारे लिए एक सरप्राइज़ भी भेजा है देखना मत भूलना...’

“विनय ...आओ अब तुम्हारे नए गिफ्ट को देखते हैंक्या भेजा है ..प्रोफ. ने!”

प्रोबोट ने एक बटन दबाया और निचे से जमीन थोड़ी सी खिसकी और उसमे से एक लंबा सा बक्सा ऊपर आया. प्रोबोट ने उसे खोला.

“अरे वाह! मामाजी ने मेरे लिए एक नयी ड्रेस भेजी है.....”

“हाँ, और ये काफी एडवांस भी है...चलो अब इन्हें पहनो..फिर तुम्हें इसके बारें में बताता हू.”

विनय ने तुरंत ही पूरी ड्रेस पहन ली.

“अरे प्रोबोट, मैं तो इसको देख कर सोच रहा था की ये ड्रेस मेटल की है जो इसमें इतनी शाइन है और दूर से देखने में स्टील या ऐसे ही मेटल की सोच रहा था पर ये तो कपडे जैसी है.”

“हा विनय, ये ड्रेस असल में हाई क्रिस्टल सिलिकॉन फाइबर से बनी है, जो तुम्हे पुरानी एस्बेस्टोस वाली ड्रेस की खूबियों के साथ और भी नयी खूबी देती है..,..तुम्हारी ड्रेस के साथ हमेशा एक प्रॉब्लम आती है और वो पॉवर का खत्म हो जाना..क्यूंकि परमाणु शक्ति तुम्हे लगातार नहीं मिल पाती थी..पर अब ऐसा नहीं होगा. इस ड्रेस में कई छोटे छोटे सिलिकॉन वफेर्स प्लांट किये गए हैं जो दिन में सोलर उर्जा का उपयोग करके तुम्हे शक्ति देंगी..और रही रात की बात तो तुम्हारे पास परमाणु शक्ति तो है ही. इन सोलर सेल्स को तुम बेक-अप की तरह भी इस्तेमाल कर सकते हो.”

विनय ध्यान से ड्रेस के बारें में सुन रहा था.

“इस ड्रेस से अब तुम चाहो तो अपने पुरे शरीर को ढक सकते हो चाहो तो सिर्फ सुरक्षा कवच की तरह इस्तेमाल कर सकते हो. तुम्हारी पहले वाली पॉवर्स जैसे श्रींक हो जाना, गायब हो जाना इसमें भी हैं. इसके अलावा तुम्हें जो नई पॉवर्स मिली है वो हैं..गामा स्केनर जो की तुम्हारी आइस के कवर पर लगा हुआ है..और एक दूसरा तुम्हारे लेफ्ट पॉवर ब्रासलेट पर लगा हुआ है..इसी स्केनर के साइड में देखो..एक ब्लू बटन है..इसको दबाने पैर तुम्हारे चारों तरफ फोर्स फिएल्ड पैदा हो जाएगी जो दुशमन के हमले से तुम्हे बचाएगी. बाकी पॉवर्स तुम धीरे धीरे जान जाओगे..ये सब वोइस एक्टिवेटिड भी हैं...पर अब तुम्हारी सबसे अलग और नयी शक्ति..वो है ...अपनी बेल्ट पर देखो एक एफ १ नाम से बटन बना है...इस बटन को दबाते ही तुम्हारे परमाणु क्लोन बन जाएँगे..जितनी बार तुम इसे दबाओगे उतने ही क्लोन बन जाएँगे ..देखो..”

विनय ने बटन दबाया...और आश्चर्य ...उसके साथ उसी का ही एक और रूप खड़ा था.

“परमाणु ये तुम्हारा एक तरह से ३-डी इमेज है जिस पर किसी चीज़ का असर नही होगा पर ये किसी भी चीज़ पर असर कर सकती है..पर इसका इस्तेमाल ध्यान से करना क्यूंकि ये शक्ति सबसे ज्यादा उर्जा खर्च करेगी.”

“थेंक यु मामाजी...एंड टू यु प्रोबोट ...पर अब ये तो बताओ की इसे उतारों कैसे..”

“हा हा हा ...तुम्हे इस ड्रेस को पहनने के लिए सिर्फ एक वर्ड बोलना है..परमाणु..और उतारने के लिए..विनय..ये ड्रेस स्वचालित रूप से ही तुम्हारे ऊपर से हट जाएगी.”

उसके बाद विनय ड्रेस लेकर चला गया...और शाम तक मामा जी के बारें में ही सोचता रहा. पर कही और कुछ और ही चल रहा था.

“क्या हुआ ..ऐसे मुह लटकाए क्यों आ रहे हो? मिला?”

“नही, अल्फा, पूरी लैब छान मारी पर कहीं नहीं मिला”

“तुम दोनों किसी काम के नहीं हो! उस प्रोफ. को भी भी अभी अपराध छोड़ने की सनक लगनी थी? और १-२ साल बाद जाता तो हम यहाँ के बादशाह बन जाते.”

“पर अल्फा यार, वो जा तो रहा है..और हम उसे रोक भी नही सकते...कहीं उसने सारी बातें पुलिस को बता दी तो??”

“नहीं गामा , पहली बात वो ऐसा नहीं करेगा और करेगा भी तो वो जानता है की पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती और न ही अब परमाणु..उसकी अब हर शक्ति का तोड़ है हमारे पास हा हा ...बस एक बार वो वेव बाल हमारे हाथ आ जाये..पर पता नहीं उसने बुड्ढे ने वो बाल कहाँ छुपाई है?”

“लेकिन अल्फा इस बिच हमें परमाणु को खत्म करने के लिए भी जाल बिछाना होगा..”

“सही कहा बीटा, जाओ तयारी करो..” अल्फा, बीटा और गामा कुछ करने वाले थे.

एक रूम में...प्रोफ. के.के.

“हम्म..सारा बैग पैक हो गया है...’विनय बेटा मैं आ रहा हू’...मुझे बस अपने नए आविष्कार का गलत हाथों में जाने का डर लग रहा था..पर अब मैंने वो ऐसी जगह छुपा दिया है, की वो क्या उनका बाप भी नही ढूंड पाएगा!”

सोमवार का दिन.

विनय ने अपनी नई परमाणु ड्रेस जीप में रखी और पुलिस स्टेशन चल दिया. स्टेशन पहुँचते ही इंस्पेक्टर धनुष और बाण ने विनय को जीप में से उतरने से पहले ही रोक देते हैं.

“अरेरे...क्या कर रहे हो?”

“साहब जी! गडबड हो गयी है...कनाट प्लेस एरिया में एक रे-मैन नाम का अजीब सी चीज़ आ गयी है...और वहाँ तबाही मचा रहा है.”

विनय ने तुरंत जीप मोड़ी और उसी दिशा में घूम गया. रे-मैन ने कनाट प्लेस के राह चलते लोगों को अपनी रे में बंद कर दिया था..विनय उतरा..उसने बन्दूक निकाली पर बाकी पुलिस वाले भी गोली ही चला रहे थे और उस पर कुछ खास असर नही हो रहा था..विनय को पता था..परमाणु ही बनना पड़ेगा.

“परमाणु....!!??...परमाणु....अरे प्रोबोट ने तो कहा था की मेरे परमाणु बोलते ही ड्रेस अपने आप मुझ पर कवर हो जाएगी.? फिर अब क्या हुआ?”

विनय ने ड्रेस को निकला..

“ओह ..शीट...मैन जल्दबाजी में मैं पुरानी परमाणु ड्रेस पहन आया..हम्म..चलो ओल्ड इस गोल्ड इसीको पहन लेता हू.” विनय परमाणु बना और रे-मैन के ठीक ऊपर पहुँच गया. परमाणु ने परमाणु छल्लों वार उसके हाथ पर किया जहाँ से किरणे निकल रही थी. किरणों का निकलना बंद हो गया.

रे-मैन ने ऊपर देखा परमाणु उड़ रहा था..

“परमाणु...हा हा ..अब तू नही बचेगा...मैं तुझे ही देखना चाहता था...ये देख मेरी प्लास्मा रे..”

प्लास्मा रे परमाणु को लगी और परमाणु तड़प कर रह गया..उसने अपनी छाती पर देखा, साइड से उसकी ड्रेस फट गयी थी...अगर एक और प्लास्मा रे का वार लगा तो वहां उसके शरीर में एक बड़ा छेद दिखाई देगा!..परमाणु अभी ये ही सोच रहा था की..रे-मैन ने कर्रेंट रे का वार कर दिया..जिससे परमाणु का सारा सिस्टम बिगड गया और उसका प्रोबोट से मदद लेने का मौका भी चला गया. परमाणु निचे गिर गया..रे-मैन उसकी और बढा ही था की अचानक कुछ उड़ता हुआ आया और उसे गिरा गया..रे-मैन ने सामने देखा परमाणु के साथ प्रलयंका खड़ी थी..

“तू कौन है लड़की?”

“तुम जैसे कमीनों के लिए प्रलय का दूसरा नाम है..प्रलयंका हू मैं..”

उसने दो-तीन बार प्रलयंका पर वार करा पर वो बच गयी...इधर परमाणु को होश आ रहा था..

“अरे ये स्क्रीन यहाँ कहा से आई..?” परमाणु ने देखा वहीँ प्रलयंका भी थी..

“जरूर ये ही लायी होगी...”

रे-मैन ने दुबारा वार करा प्रलयंका लेकिन इस बार परमाणु ने वो स्क्रीन बिच में फैंक दी..उस स्क्रीन ने रे-में द्वारा फैंकी गयी रे को पलट कर उसी पर वार दिया और वो बेहोश हो गया. परमाणु फिर से बेहोश हो गया. प्रलयंका ने परमाणु को उठाया और अपने साथ ले गयी.

“उफ़, ये प्रलयंका अगर बिच में नहीं आती तो आज परमाणु खतम था!”

“हा अल्फा, अब हमें फिर से कोई नया प्लान बनाना पड़ेगा!” बीटा बोला.

इधर मीडिया पर खबरें फ़ैल गयी थी. ‘परमाणु को बचाया प्रलयंका ने...’

शीना ने भी ये खबर जब टीवी पर देखि तो उसए जलन होने लगी..उसे अच्छा नहीं लगा प्रलयंका का परमाणु के साथ होना.

फ्यूजन चैम्बर.

“अरे परमाणु, ये क्या हो गया तुम्हे? तुम्हारी नई ड्रेस कहाँ है?”

“वो..आह..मैंने गलती से पुरानी ड्रेस रख ली थी...”

“ओह परमाणु तुम भी न! अगर प्रोबोट मुझे वो स्क्रीन लेकर न भेजता तो तुम गए थे समझो!”

तीन तरफ परेशानी बढ़ चुकी थी.

एक-परमाणु को अब ज्यादा ध्यान देना पड़ेगा दुशमनों के खिलाफ

दो- अल्फा, बीटा गामा जरूर अब कोई न्य खतरनाक प्लान बनाएंगे

तीन-प्रोफ. की चिंता इस घटना से और बढ़ गयी थी.

“परमाणु पर अब तुम्हें चिंता करने की कोई जरुरत नहीं है, अब मैं भी तुम्हारे साथ आ गयी हू..और अपराधियों से लड़ने में अब तुम्हारी मदद करुँगी.”

परमाणु घर की ओर चल दिया...पर घर जाने से पहले वो शीना के घर गया. शीना वहां नाराज़ बैठी थी..

“अरे क्या हुआ? ऐसे कैसे बैठी हो?”

“आ गए तुम उस लड़की के साथ मौज मना के ...फुर्सत मिल गयी तुम्हे?”

“कौन..कौनसी लड़की की बात कर रही हो तुम...?”

“वो ही ..जो तुम्हें उठा कर ले गयी थी चुड़ैल...”

“उफ़!! शीना वो सिर्फ मेरी दोस्त है उसने कई बार मेरी जान बचायी है..”

दोनों में बहस शुरू हो गयी और गुस्से में आकर परमाणु चला गया.

कहानी यहाँ से थोड़ी तेज हो जाती है..बिच की चीज़ें छोड़ दी गयी हैं.

अल्फा, बीटा और गामा ने दिल्ली पर हमला बोल दिया ...परमाणु बिच में आ गया...

“मम्मी वो आसमान ने नया सुपर हीरो कौन है?”

“बेटा, वो परमाणु ही है पर उसने अपने कपडे बदल लिए हैं..”

अल्फा ”अरे, ये कौन है?”

परमाणु “ध्यान से देखो ..मैं परमाणु ही हू...जब तुम रोज नयी शक्तियों का इस्तेमाल करते हो तबाही मचने के लिए तो मैं क्यों नहीं?”

उसी समय गामा बोला “अल्फा, मुझे यकीं नही हो रहा है..हम जिस वेव बाल को इधर उधर ढूंड रहे थे वो तो परमाणु के अंदर है...”

ये बात सुनते ही..तीनो एक जाल बनाते हैं...अल्फा अपनी पॉवर बीटा के साथ जोड़ कर परमाणु पर हमला करता है. और ये पॉवर परमाणु के अंदर डाली वेव बाल से रेअक्ट कर जाती है..चारों तरफ रौशनी फ़ैल जाती है..और बस तबाही मचाने वाली ही होती है की प्रोफ. वहां आ जाते हैं और परमाणु की मदद करते हैं पर इस में उनको बहुत बुरी चोट लगती है और वो मरणासन हो जाते हैं. वो प्रोबोट को बुलाते हैं..प्रोबोट गामा और बीटा की हालात बुरी कर देता है..पर वावे बाल की किरणे उसको खत्म कर देती है.उनकी हालत देखकर परमाणु को गुस्सा आ जाता है और वो तीनो को मार देता है...इसमें उसकी मदद शीना और प्रलयंका भी करती है.

प्रोफ. को हॉस्पिटल ले जाया जाता है जहाँ डॉ. उन्हें बचा लेते हैं. परमाणु को नयी पॉवर्स तो मिलती ही हैं साथ ही मामाजी वापिस मिल जाते हैं. और शीना का भरोसा मिल जाता है.

ये स्टोरी सिर्फ छोटे से आईडिया पर बनायीं है..इसलिए ज्यादा बढाया नही गया है.

समाप्त.

User reviews

Average user rating from: 3 user(s)

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Overall rating 
 
3.8
Plot 
 
3.8  (3)
Characterization 
 
3.5  (3)
Exposition 
 
4.0  (3)
 
All-Clear 2011-12-22 13:39:40 YOUDHVEER SINGH
Overall rating 
 
3.5
Plot 
 
3.5
Characterization 
 
3.0
Exposition 
 
4.0
youdhveer Reviewed by youdhveer    December 22, 2011
Top 10 Reviewer  -   View all my reviews

All-Clear

Plot achcha tha....lekin Parmanu ke uss waqt ke hisaab se ab har writer ko naya kuch likhne ki sochni chhaiye.....kuch cheezein hain jo har writer baar baar repeat karta hai...jaise Mama ji aayenge toh Dress mein badlaav lekar hi....yeh cheez baar baar nahin aani chahiye...
well kahani Parmanu ki hai aur Action ke lihaaz se achchi lagti hai....but isme kuch doosre ingredients gayab hain....isliye comics ka poora mazaa nahin aa pata.

All-Clear 2010-10-04 19:21:38 Saurabh Agrawal
Overall rating 
 
3.8
Plot 
 
4.0
Characterization 
 
3.5
Exposition 
 
4.0
skagrawal4k Reviewed by skagrawal4k    October 05, 2010
Last updated: October 22, 2010
Top 50 Reviewer  -   View all my reviews

nice

maine aaj tak parmanu ki sirf ek solo cmx padhi hai....baaki meri jaankari sirf uski dhruv nagraj ki multi-starrers tak hi seemit hai, lekin mujhe ye kahani bahut achchi lagi..

bas ek shikayat hai ki jo kahani itni achchi se jaa rahi thi, use aapne bahut hi jaldbaazi me khatm kar diya..

All-Clear 2010-07-26 08:31:53 Mohit Sharma
Overall rating 
 
4.0
Plot 
 
4.0
Characterization 
 
4.0
Exposition 
 
4.0
TRENDSTER Reviewed by TRENDSTER    July 26, 2010
Top 10 Reviewer  -   View all my reviews

Gr8

Story mey mujhe 3 baatein achchhi lagi. Ek to wo scene jisme Inspector Vinay ka tumne positive chitran kiya hai, doosra tumne usko nayi dress kay saath jo powers di hai ya modify ki hai wo bhi mujhe achchhi lagi. Saath hi Mama KK bhi waapas aa gaye. Dialogues mey tumne realistic language use ki. Very Good!!!

 
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