TILISMDEV AUR TILISMASUR

Email
Printed
TILISMDEV AUR TILISMASUR
Code: GENL-0315-H
Pages: 32
ISBN: 9788184917215
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Tarun Kumar Wahi
Penciler: Dilip Kadam, JayPrakash Jagtap
Inker: N/A
Colorist: N/A
Paper: Plain
Condition: Old Stock
Price: Stickered
Rs. 30.00
Add to wish list

Reviews

Thursday, 24 July 2014
वाही जी ने कितनी मज़बूत और जानदार कथा लिखी है इस कॉमिक्स में और जिसे अपने बेहद मज़बूत चित्रांकन से कदम और जगताप जी ने जीवंत किया है| कॉमिक्स में कल्पतरु नमक एक राज्य में तिलिस्मासुर नामक रक्षक अपने अत्याचार के भयावह आतंक से सबको कपाँ डालता है और उस राज्य के वीर राजा और सेनापति को भी तिनके कि तरह ख़त्म कर डालता है| 1.कॉमिक्स में तिलिस्मासुर द्वारा राजा और सेनापति की हत्या आपको अन्दर से झकझोर देगी| 2.एक अत्यंत क्रूर,नीच और पाशविक राक्षस से लड़ने के लिए सारथी पतिबल द्वारा `तिलिस्मदेव' का नाम सुझाना आपको उम्मीद और विशवास से भर देता है| आगे कॉमिक्स में जिस तरह तिलिस्मदेव राजकुमार कि मदद करके उसे न्याय दिलाते हैं वो काफी अच्छी तरह प्रस्तुत किया गया है और कॉमिक्स के एक्शन दृश्य भी बेहद अच्छे हैं|यह कॉमिक्स पौराणिक काल कि वीरता और शौर्य कर्तव्य से भरी कहानियों के पाठको को अवश्य पढ़नी चाहिए उन्हें बहुत रोमांच और आनंद आएगा. कदम और जगताप जी ने मौखिक हावभाव और पृष्ठभूमि यानी बैकग्राउंड पर विशेष ध्यान दिया है 9/10.
sachin dubey
Saturday, 15 February 2014
Its very good comic artwork is average
Prince Jindal
Sunday, 09 February 2014
विशाल राज्य कल्पतरु और उसके आस पास के पच्चीस राज्यों में छाया हुआ था तिलिस्मासुर का आतंक जो राज्यों के नागरिकों को उठा ले जाता बलि देने के लिए. सभी राजाओं ने तलाश शुरू की तिलिस्मासुर की और कल्पतरु राज्य के शक्तिशाली राजा कल्पतरु ने उसे ढूंढ़ निकला परन्तु तिलिस्मासुर ने उसको ही कर दिया ख़त्म और प्राप्त कर ली अद्भुत शक्ति जिसके संपर्क में आते ही प्रत्येक इंसान जानवर में बदल जाता. अपनी इस शक्ति के बल पर निकल पड़ा तिलिस्मासुर विश्वविजय पर. इधर तिलिस्मासुर का खत्म करने और अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए राजकुमार धनुषधम्बी ने पुकारा तिलिस्मदेव को. फिर क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें।
Mukesh Gupta
More reviews