PARCHHAINYON KA CHOR

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PARCHHAINYON KA CHOR
Code: GENL-0323-H
Pages: 32
ISBN: 9788184917291
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Meenu Wahi
Penciler: Dilip Kadam, JayPrakash Jagtap
Inker: N/A
Colorist: N/A
Paper: Plain
Condition: Old Stock
Price: Stickered
Rs. 30.00
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Reviews

Tuesday, 18 February 2014
Its very good comic artwork is average
Prince Jindal
Sunday, 09 February 2014
The concept,story & artwork all are awesome.
Rajal Sharma
Sunday, 09 February 2014
देवालय नगर में मचा हुआ था एक रहस्यमय चोर का आतंक जो लोगों के सामान के साथ चुरा लेता था उनकी परछाइयाँ भी. इस रहस्यमय चोर कालभूत ने लोगो की परछाइयाँ चुरा कर बना ली थी अपनी परछाइयों की सेना जिस पर वार करने का मतलब था उस परछाई के निर्दोष मालिक पर वार करना. इस परछाइयों के चोर कालभूत ने मचा दिया देवालय में हाहाकार. तब इससे निबटने के लिए राजा विष्णुव्रत ने लगायी गुहार बाबा तिलिस्मदेव से. फिर क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें।
Mukesh Gupta
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