TILISM KA KHILADI

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TILISM KA KHILADI
Code: GENL-0378-H
Pages: 32
ISBN: 9788184917840
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Meenu Wahi, Tarun Kumar Wahi
Penciler: Pratap Mulick, Chandu
Paper: Plain
Condition: Old Stock
Price: Stickered
Rs. 30.00

Reviews

Saturday, 15 February 2014
Its very good comic artwork is average
Prince Jindal
Sunday, 09 February 2014
All the comics in the initial or the so called Launching series of Ashwraaj are very good & this is no exception. Ashwraaj proved that he's definitely a true "Khiladi". Story is really interesting & gripping as well as artwork is also great. Must read.
Rajal Sharma
Tuesday, 04 February 2014
कहानी की शुरुआत अश्वराज और महर्षि फून्क्समान द्वारा भेजे गए एक और शिष्य कन्या के टकराव के साथ होता है. अश्वराज स्त्रियों पे हाथ नहीं उठता और येही बात तूताबूता और दादुबोरा के लिए खतरे का सूचक बन जाती है की अश्वराज ने अगर कुछ न किया तो उनका सपना अधूरा रह जाएगा. दूसरी तरफ महर्षि फून्क्समान की कहानी अनुसार अश्वराज को चल लेती है अश्वाकिर्ती. उसका सामना खजाने के अंदर काल्खाजूरा, चांडाल. पंजाल, भोकंप और चोषक से होता है. उन्हें परास्त कर देता है अश्वराज लेकिन तब तक अश्वान्तक अपनी सेना को ले कर पहुँच जाता है कारू के खंजाने तक. इस युद्ध के दौरान हो जाती है अश्वराज की मृत्यु जिसे उसके रथ से लगे घोड़े ले जाते है युध्भूमि से. और तारपीडो (अश्वराज के पिता) वहां पहुँच कर दुश्मनों के बीच तबाही मचा देते हैं. कहानी बहुत ही अच्छी है और कई अलग अलग टकराव दिखाए गए हैं. एक ही कहानी में अश्वराज के पिछले जन्म की कहानी और आज की कहानी को काफी अच्छी तरह से दिखाया गया है. आर्टवर्क अच्छा बना है. कई इंटरेस्टिंग पहलू जुड़ गए हैं इसमें
AKASH KUMAR BARNWAL
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