TILISMDEV AUR KANKADA KI MAUT

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TILISMDEV AUR KANKADA KI MAUT
Code: GENL-0379-H
Pages: 32
ISBN: 9788184917857
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Meenu Wahi
Penciler: Chitrak
Inker: N/A
Colorist: N/A
Paper: Plain
Condition: Old Stock
Price: Stickered
Rs. 30.00

Reviews

Saturday, 15 February 2014
Its very good comic artwork is average
Prince Jindal
Monday, 10 February 2014
अपाला सम्राट अपोलो जिसके पास था एक अद्भुत शक्तिडामंड जिसको पाने के लिए कई राज्य करते रहते थे उन पर हमला। उस शक्तिडामंड की सुरक्षा के लिए सम्राट अपोलो के पास थे पांच शक्तिशाली रक्षक। इधर पांच वर्षों से घोर तपस्या कर शैतान कंकाडा ने प्राप्त किया वरदान कि युद्ध में उसको कोई नहीं मार सकता था। वरदान प्राप्त कर कंकाडा ने कर दिया अपाला पर हमला और युद्ध में पाँचों रक्षकों को कर दिया पराजित। तब अपाला के सेनापति अद्धरंग ने मदद के लिए पुकारा तिलिस्मदेव को परन्तु तिलिस्मदेव भी थे दुविधा में क्योंकि कंकाडा को प्राप्त था युद्ध में ना मारे जाने का वरदान। फिर क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें।
Mukesh Gupta
Sunday, 09 February 2014
Youdh me kabhi na harne ka vardaan prapt kar k shaitan kankda start karta h tabahi machana.. Fir usko rokne k liye senapati leta h tilismdev ki help Normal typical tilismdev wali story h Artwork theek h
Deepak Pooniya
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