SHUKRAAL AUR HALEEPA

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Printed
SHUKRAAL AUR HALEEPA
Code: GENL-0456-H
Pages: 32
ISBN: 9788184918625
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Tikaram Sippi
Penciler: Pratap Mulick, Chandu, Kamble
Inker: N/A
Colorist: N/A
Paper: Plain
Condition: Old Stock
Price: Stickered
Rs. 30.00
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Reviews

Saturday, 15 February 2014
Its very good comic artwork is average
Prince Jindal
Monday, 10 February 2014
टर्की का क्रूर सम्राट हलीपा जो बनवाना चाहता था एक अद्भुत महल जिसके आगे संसार के सभी महल फीके लगे इसके लिए उसने सर्वप्रथम विश्व विजय के लिए शुरू किया नरमेघ यज्ञ जिसमे उसने अपना 'नर' चुना शक्तिशाली युवक शुक्राल को। शुक्राल चल पड़ा एक के बाद एक युद्ध जीतता हुआ और जा पहुंचा शुक्र देश जहाँ की सम्राज्ञी पटाखा ने बना लिया शुक्राल को बंदी। इधर हलीपा हो चुका था पटाखा पर मोहित और बनाना चाहता था उसको अपनी रानी। इधर पटाखा को पता चला की शुक्राल है उसी का पति जो कई वर्ष पूर्व उससे विवाह कर उसको सबक सिखाने के लिए मौत के मूंह में कूद गया था। यह जान पटाखा ने शुक्राल को कर दिया आज़ाद परन्तु शुक्राल ने आज़ाद हो पटाखा को ही बंदी बना पेश कर दिया हलीपा के पास। फिर क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें।
Mukesh Gupta
Thursday, 06 February 2014
An average story with a good artwork.
Rajal Sharma
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