LAASHKHOR

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Printed
LAASHKHOR
Code: GENL-0792-H
Pages: 32
ISBN: 9789332401983
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Tarun Kumar Wahi
Penciler: Vinod Kumar
Colorist: Sunil Pandey
Paper: Plain
Condition: Old Stock
Price: Stickered
Rs. 30.00

Reviews

Sunday, 21 September 2014
Awesome story, great artwork, and one of the best of Anthony. 10/10.
Vishal Bakhai
Thursday, 10 April 2014
लाशखोर मेरे अनुसार एंथोनी की सबसे अच्छी और मज़बूत कहानी है जिस प्रकार वाही जी ने कॉमिक्स के माध्यम से शांति और शाकाहार का सन्देश दिया है वो वाकई काबिले तारीफ और अत्यंत सराहनीय है और वाही जी ने कॉमिक्स में खलनायक के रूप में एक से बढ़कर एक हैवानो और दरिंदो को दिखाया है और कहानी बेहद मज़बूत और अहिंसा और शाकाहार का सन्देश देती है. मैं स्वयं भी शाकाहारी हूँ और शाकाहार की कीमत पहचानता हूँ की 1 किलो मीट के लिए 5 किलो अनाज(पशु को चारे के रूप में) और 50 गैलन पानी की बर्बादी होती है(मीट को ताज़ा रखने के लिए और बार बार धोने के लिए) इसी लिए विश्व में भुखमरी का एक कारण मांसाहार भी है जबकि 5 किलो गेंहू के लिए सिर्फ 20 गैलन पानी ही खर्च होता है और अब अमेरिका के खाद्य विभाग ने साफ़ साफ़ बता दिया है की red meat कैंसर का सबसे बड़ा कारण है. कॉमिक्स के अगले भाग `चार हत्यारे' का एक दृश्य मुझे बोहोत बोहोत पसंद है की जब एंथोनी एक जानवरों के कत्लखाने में जाता है तो वाही जी ने क्या ताकतवर संवाद लिखा है "वहां की हैवानियत और क्रूरता को देख कर वो मुर्दा भी सिहर गया" इतना मज़बूत संवाद सिर्फ एक मज़बूत लेखक ही लिख सकता है. बोहोत बोहोत अच्छी कॉमिक्स है ये. 10/10.
sachin dubey
Friday, 14 February 2014
story of this comic is good. artwork is also fine
Prince Jindal
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