BHANJA

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Printed
BHANJA
Code: SPCL-0021-H
Pages: 64
ISBN: 9789332406605
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Tarun Kumar Wahi
Penciler: Pratap Mulick, Milind Misal
Inker: N/A
Colorist: N/A
Paper: Plain
Condition: Fresh
Price: Stickered
Rs. 60.00
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Reviews

Friday, 14 February 2014
overall it was a good comic artwork was nice story was good also
Prince Jindal
Monday, 10 February 2014
Raja pratapraj bhanja ne apna rajpaat wapas paane k liye shuru kiya tantrik yagya aur apne saath apne harek naukar ki de di bali. Ab wo haweli abhishapit ban gayi. Idhar shahar me faila hai kahar kapalfodo ka jise rokne aate hain gagan aur vinashdoot.. Aur tabhi prakat hota hai bhanja jisne macha di har taraf tabahi.. Kaise ruka wo?? Janne k liye ye ths visheshank.
AKASH KUMAR BARNWAL
Sunday, 09 February 2014
राजा प्रतापराज भन्जा जिसने अपना राजपाट समाप्त होने के बाद फिर से वही रुतबा प्राप्त करने के लिए शुरू की तांत्रिक प्रक्रिया और ले ली अपनी और अपने सभी नौकरों की जान। उसकी लाल हवेली को घोषित कर दिया गया भूतिया और हो गयी वो लाल हवेली वीरान। बरसों बाद चार बदमाश बन्ने, चाक़ू, बाला और सोनी जिनके बुल्टी दादा से उधार लिए पैसे डूब गए। वो बुल्टी दादा से बचने के लिए जा छिपे उसी भन्जा की लाल हवेली में जहाँ उनका सामना हुआ बरसों से तपस्या करता हुआ भन्जा। भन्जा के पास थी सोना बनाने की एक वीभत्स विधि जिसे भन्जा को घायल कर चुरा लिया उन चारों ने। इधर शहर में फैला कपालफोड़ों का आतंक जो आते और एक इंसान को उठा ले जाते। और अगले दिन मिलती उसकी लाश। कपालफोड़ों का आतंक समाप्त करने आ पहुंचे सुपर मानव गगन और विनाशदूत परन्तु तभी प्रकट हुआ भन्जा और ढा दिया सभी कपालफोड़ों पर कहर। भन्जा को थी तलाश अपने सोना बनाने वाली विधि के फ्रेम की। तब गगन और विनाशदूत जुट गए भन्जा और उसके रहस्य को जानने के लिए। फिर क्या हुआ? जानने के लिए पढ़ें।
Mukesh Gupta
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