PRAHARA

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Printed
PRAHARA
Code: SPCL-0252-H
Pages: 64
ISBN: 9789332408920
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Sanjay Gupta
Penciler: Kadam Studio
Inker: N/A
Colorist: N/A
Paper: Plain
Condition: Fresh
Price: Stickered
Rs. 60.00

Reviews

Saturday, 29 March 2014
प्रहारा की कहानी संजय जी ने अनुपम सिन्हा जी की कल्पना के आधार पर लिखी थी तो सर्वमान्य है की कहानी मज़बूत ही होगी, इसमें एक्शन और भोकाल की बेबसी के बीच तुरीन और भोकाल के प्रेम की भावना भी है. कैसे भोकाल का प्रहारा गलत हाथो में पड़ कर विकासनगर का काल बन जाता है और कैसे भोकाल भी विकासनगर को नहीं बचा पाता, कहानी का अंत बेहद भावुक और मज़बूत है और राक्षसों पर भोकाल शक्ति का असरकार न होना कहानी और एक्शन दृश्यों को और मज़बूत बनता है. चित्रांकन तो कदम जी का सदेव से ही मज़बूत रहा है, उनके चेहरों के हाव भाव बहुत ही असली और जीवित लगते हैं. आजकल इस हिंगलिश के भ्रष्ट ज़माने में भोकाल की कॉमिक्स में शुद्ध हिंदी आत्मा को सुकून और गर्माहट पहुचाती है. 9/10.
sachin dubey
Monday, 10 February 2014
The story of this comics is amazing. The story is entirely based on Prahara which falls into the mud. Prahara is found by a villain and he misused it...How did Bhokal won the battle? Read this...artwork is good.
Prashant Rawat
Sunday, 09 February 2014
good story and a very good artwork.Bhokal's prahara is used against himself in this comics.must read.
Anant Gulhane
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