BHERIYA VANSH

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Printed
BHERIYA VANSH
Code: SPCL-0273-H
Pages: 64
ISBN: 9789332409132
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Tarun Kumar Wahi
Penciler: Dheeraj Verma
Inker: Rajendra Dhoni
Colorist: N/A
Paper: Plain
Condition: Fresh
Price: Stickered
Rs. 60.00
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Reviews

Sunday, 04 May 2014
इस कॉमिक्स की सबसे अच्छी बात ये रही की की इसमें भेड़िया नगर वुल्फानो की एकदम प्रथम सृष्टि से शुरुआत दिखाई है लेखक वाही जी ने. वैसे वाही जी ने भेड़िया उत्त्पति की एक बेहतरीन कथा लिखी है जिसमे वीरता, विशवास, लालच और गद्दारी का भरपूर समावेश है. वैसे कहानी का असली सस्पेंस एकदम अंत में ही जाकर खुलता है और लगभग 98% कहानी फ्लैशबैक यानी भूतकाल में है. कहानी में लेखक ने बेहद ज्ञानवर्धक सन्देश दिया है की जब व्यक्ति अपने ऊपर नियंत्रण न रख लालच के चाहे वो औरत का हो या राज्य का के वशीभूत होता है तो उसका कैसा विनाश होता है. कहानी बहुत अच्छी बनी है और चित्रांकन बेहद मज़बूत तो नहीं लेकिन ठीक ठाक अवश्य कह सकते हैं और कॉमिक्स का संपादन भूतकाल कथा को देखते हुए अच्छा किया है मनीष जी ने अगर वो अंत के सबूतों की ओर थोडा और प्रकाश डालते तो और भी अच्छा रहता. बहुत ही अच्छी कहानी लिखी है वाही जी ने. 8.5/10
sachin dubey
Wednesday, 19 February 2014
Best digest of kobi and bhediya
Prince Jindal
Sunday, 09 February 2014
Iss comics main kaalnemi kahani sunata hai ki vulfaano kaise bana... kaise vulfa ne surwaya se vivaah kiya kaise bheriya paida hua aur kaiase hua vulfaano tabaah aur aakhir me wo aisi sachchaai bayaan karta he ki ho jaate he kobi and bheriya apne guru bhaatiki ke khoon ke pyaase... kobi ke powers ka raaj bhi yehin se pata chalta hai..Good story with good artwork.
Prashant Rawat
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