NARAK DANSH

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Printed
NARAK DANSH
Code: SPCL-2554-H
Pages: 96
ISBN: 9789332422506
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Nitin Mishra
Penciler: Hemant Kumar
Inker: Vinod Kumar, Jagdish Kumar
Colorist: Shadab Siddiqui, Abhishek Singh
Paper: Glossy
Condition: Fresh
Price: Printed
Rs. 90.00
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Description नरक दंश # 2554 एक पिता आज करने जा रहा है अपने ही बेटे की नीलामी| कौटिल्य नागमणि ने महानायक नागराज को जकड़ दिया है बेड़ियों में और सम्पूर्ण अपराधजगत के सामने कर रहा है उसे नीलाम| क्या बन जाएगा आज यह नरक नाशक एक खलनायक या उसकी नियति उसे नहीं झेलने देगी यह नरक दंश| जानने के लिए पढ़ें रोमांच और भावनाओं से ओतप्रोत यह उत्पत्ति श्रंखला!
Paperback Comics/Books that are parts of same Series
Collector Editions that are parts of same Series

Reviews

Friday, 31 October 2014
Till now series is better but slowly getting very confused as present and past are mixed and no proper sequence is followed... suddenly story shifts from past to present n vice versa... have to keep on reading again and again... although artwork is good and really liked the collectors edition...
Ritesh Kumar
Friday, 31 October 2014
I am really very upset to read the story of narak dansh. Nothing New. Jo RC ke purane readers ha aur nagraj ko bachpan se padh rahe ha unke liye story me kuch b new nahi... Haa network again going better and better beech me artwork bhaut kharab ho gaya tha but ab artwork really good but sirf artwork ke liye Rs. 110 very expensive. Yaar RC we want some new stories please do something warna aese 3-3 nagraj lane ka koi fayada nahi ha. visvarakash nagraj ki stories he aage badao purane villain lane ha unhe he wapas lekar aao par visvarakashk nagaraj ki comics me kam se kam itna confuse to nahi honge
Mohan Lal Mourya
Thursday, 30 October 2014
वैसे तो ये एक अच्छी सीरीज है...लेकिन अब बहुत जादा ही कंफ्यूज कर रही है...parallel चल रही भूत और वर्तमान की कहानिया ही गड़बड़ कर रही...कभी लगता है के...आगे की कहानी अतान्कहर्ता नागराज की होगी तो कभी लगता है के विश्वा रक्षक नागराज की होगी....ऐसा लग रहा के अभी तक जो भी नागराज के बारे मे पढ़ा वो सब बेकार हो जायेगा....देखते बाबा गोरखनाथ क्या बनाते है..
Nabi Ahmad
Monday, 27 October 2014
समीक्षा नरकदंश पेश-ए-खिदमत है नरक नाशक उद्गम श्रृंखला के तीसरी कड़ी ‘नरकदंश’ का मेरे द्वारा किया गया अवलोकन। हालांकि अब तक अधिकतर पाठक ‘नरकदंश’ पढ़ चुके होंगे इसके कई रिव्युज़ आ भी चुके हैं जहां कुछ पाठकों को यह अच्छी लगी वहीं कुछ ने इसके बहुत ज़्यादा नेगेटिव रिव्युज़ दिए। और लगभग सभी नेगेटिव रिव्यूज़ देने वालों का मुख्य कारण था इस सीरीज़ का नरक नाशक की लीक से हट कर होना। .......... ये सीरीज़ किसी भी एंगल से नरक नाशक नागराज की नहीं लग रही है, विश्वरक्षक ‘महानगर वाले’ नागराज की पुरानी कहानियों को नया रूप देकर पेश किया जा रहा है, इसको आतंकहर्ता नागराज की कहानी दिखानी चाहिए थी जो पुरी तरह जस्टीफाईड भी होती क्योंकि राज काॅमिक्स पहले भी कई बार बता चुकी है कि विश्वरक्षक नागराज और आतंकहर्ता नागराज का वर्ल्ड बेशक अलग हो लेकिन शुरूआती कहानी सेम है। आतंकहर्ता के एक ग्रीन पेज में इसका जिक्र हो चुका है। इसमें दिखाए जा रहे नागराज के आतंकवाद विनाशक सफर के दौरान मिले विलन जैसे बुल्गार, अजगर, तूफान-जू, आँखेसमान, किंग कोबरा आदि अगर आतंकहर्ता नागराज की कहानी में दिखाए जाते तो मज़ा दोगुना..... नहीं चौगुना होता। परन्तु उन्हीं विश्वरक्षक नागराज और आतंकहर्ता नागराज के किरदारों को नरक नाशक में घुसा कर इसका मज़ा किरकिरा कर दिया है। कैरेक्टर्स तो फिर भी चलते हैं पर कहानियाँ भी वैसी की वैसी उठा रहे हैं, ये तो बहुत ज्यादा हो रहा है। बात करते हैं कहानी की तो नरकदंश की कहानी दो भागों में चल रही है एक नरक नाशक नागराज के बचपन की जो नागमणि सुना रहा है दूसरी वर्तमान समय पर चल रही घटनाएं। दोनों पर बारी-बारी से आते हैं,…………। सबसे पहले नरक नाशक का बचपन जो दरअसल हम पहले से ही जानते हैं वही दोबारा रीपीट हो रहा है इसलिए इसमें मज़ा नहीं आ रहा। मज़ा इसलिए नहीं आ रहा है क्योंकि पहले से स्टोरी पता होने के कारण स्टोरी प्रिडिक्टेबल हो गई है। आगे क्या होना है इसका अंदाजा आसानी से लग रहा है इसलिए कहानी बेमज़ा हो रही है। जिन्होंने अभी नरकदंश नहीं पढ़ी है वो भी बता सकते हैं आगे क्या होना है। पहला प्वाइंट नागराज नागरत्न की तलाश में निकला हुआ है जहां उसका सामना तक्षिका से हो रहा है। अब नरक नाशक नागराज को जानने वाले पहले से ही जानते हैं तक्षिका कौन है, तो अंदाजा लगाना आसान है नागराज तक्षिका को हरा देगा और तक्षिका उसकी सहायिका बन जाएगी। इसी तरह अगर तक्षिका आई है तो शीतीका और अग्निका के साथ भी होगा और सर्पट के साथ भी। फिर इस घटनाक्रम में मज़ा क्या है? इसी वजह से नागराज को यह शक्तियां प्राप्त होने पर वह मज़ा नहीं आया जितना विश्वरक्षक नागराज को शीतनाग या नागू के मिलने पर आया था। दूसरा प्वाइंट कहानी को थोड़ा सा फेरबदल कर वही कहानी दोबारा पेश की जा रही है इससे भी कहानी में आगे क्या होना है पता चल रहा है। जैसा मुझे इस कहानी में विषप्रिय को देखकर पता चल गया कि आगे क्या होना है। सब कुछ वैसा ही है, वही नागमणि द्वीप, वही नाग मंदिर …… आगे बताने की जरूरत नहीं है, आसानी से अंदाजा लगा सकते है, ....... नाग मंदिर आया तो मंदिर में देवी की मूर्ति भी होगी, मूर्ति है तो मूर्ति के मस्तक पर मणि भी होगी, मणि है तो वो चोरी भी होगी। ये सब हम पहले भी पढ़ चुके हैं, सब लोग वही तो हैं वही मणिराज, वही शंकर शहंशाह, वही पुजारी बाबा, वही विषप्रिय तो कहानी प्रिडिक्टेबल कैसे नहीं होगी? …… अब नागराज की बोली लग चुकी है और वो अपना पहला अपराध करने निकल पड़ा है आगे की कहानी क्या होगी हम अभी से प्रिडिक्ट कर सकते हैं। बाबा गोरखनाथ आएंगे, शिकांगी आएगा, नागराज से इनकी टक्कर होगी, गोरखनाथ उसको ठीक कर देंगे। ……दूसरी और वर्तमान में भी नागराज निकला है मंदिर की तलाश में। इसके बाद क्या होगा ये भी प्रिडिक्ट कर सकते हैं। अगर ऐसे ही पहले से पता रहे कि आगे क्या होना है तो कहानी बेमज़ा हो जाती है। अब बात वर्तमान में चल रही नरक नाशक नागराज की कहानी की। वैसे तो ये भी ख़जाना सीरीज के नक्शे कदम में चलने जा रही है। पर नरकदंश के अंत में कहानी में छोटा सा जो घुमाव दिया गया है वो कुछ नया और अनप्रिडिक्टेबल लगा जिसके लिए अब इसके अगले पार्ट का इंतजार है। कहानी में जो मज़ा इन आखिरी चंद पेजों में आया है वो मज़ा शुरू के दो पार्ट और नरकदंश के आधे पार्ट से गायब था। इसी से पता चलता है कि पहले से पढ़/देख चुके चीज़ों और कुछ नया पढ़ने/देखने में क्या अंतर है। मेरे लिए इस काॅमिक्स के आखिरी के 12 पेज बाकी के 83 पेजों से कहीं ज्यादा एक्साइटमेंट रहे। इन 12 पेजों के चलते मैं इस काॅमिक्स को औसत से थोड़ा ऊपर रखता हूँ। आर्टवर्क की बात तो आर्टवर्क अच्छा बना है मुझे पहले पृष्ठ पर किया एक्सपेरिमेंट ब्लैक पेज पर व्हाइट इंक में बना नागराज का आर्टवर्क पसंद आया। सर्पट के साथ हुई लड़ाई के दृश्य अच्छे बने हैं। पुराने विलन्स के नए लुक्स भी पसंद आए पर उनको नरक नाशक के बजाए आतंकहर्ता की काॅमिक्स में देखता तो ज्यादा खुशी होती। कुल मिलाकर नरक नाशक के बचपन का जो ओरिजन दिखाया जा रहा है उसमें मुझे मज़ा नहीं आ रहा है परन्तु वर्तमान टाइम में कहानी को जो नया एंगल देने की कोशिश की है उसने मुझे अगले पार्ट का इंतजार करने के लिए विवश कर दिया है। मेरी रेटिंग्स: कहानी - 3.5/5 आर्टवर्क - 4.5/5
Mukesh Gupta
Sunday, 26 October 2014
नरकदंश नरक नाशक नजराज के उत्त्पत्ति श्रृंखला की तीसरी कड़ी है आइये इसके कुछ सकरात्मक और नकरात्मक पहलूओं को देखे। सकरात्मक पहलू 1. हेमंत जी का चित्रांकन काफी अच्छा है और उनके चित्रांकन पर विनोद जी और ईश्वर जी की इंकिंग काफी जांच रही है लेकिन अभिषेक ,शादाब जी के दृश्य प्रभाव और रंग प्रभाव इस कॉमिक्स में चित्रांकन की असली जान साबित हुए हैं . 2. कॉमिक्स का सम्पादन की 2 अलग अलग समय की कथाओं को साथ कहते हुए उसमे फ्लैशबैक का भूतकाल भी डालना ये आसान काम नहीं है लेकिन नितिन जी और मनीष जी ने इसमें गति बनाये राखी और कहीं से भी भ्रम या नासमझी कहानी में नहीं आने दी . 3. कॉमिक्स में नागराज का नागरत्न को प्राप्त करने के लिए 3 चरणो की प्रतियोगिता को पार करना और ध्रुव की तरह अपने आस पास की वस्तुओं दुश्मन को हराना काफी अच्छा लगा। 4. नागराज का ये संवाद की क्या तुम तीनो ने एक ही जगह से आणि डायलाग डिलीवरी सीखी है ? काफी अच्छा लगा। 5. पेज नंबर 70 में नागराज का विषप्रिय से लड़ना काफी स्टाइल से 'वेव ' तरंग एक्शन दृश्य के ज़रिए दिखाया गया है वो बहुत बहुत मज़बूत और अच्छा लगा। 6. नागराज के पुराने खलनायको जैसे किंग कोबरा और तूफ़ान जू आदि का देखकर राज कॉमिक्स के पुराने दिन ताज़ा हो गए और ऐसा सिर्फ नितिन जी ही अपनी कहानी में कर सकते हैं। नकरात्मक पहलू 1. राज कॉमिक्स उन वजहों में से एक है जिस कारण आज देश में हमारी राष्ट्रीय भाषा हिंदी ज़िंदा है तो कृपया अंग्रेजी या हिंगलिश का काम से काम प्रयोग करें और हिंदी को ज़िंदा रखें इसी में राज कॉमिक्स की पहचान है। 2. अगर अलग अलग इंकर और रंगकार रखे गए हैं तो कृपया उनके अलग अलग काम का विवरण अलग पेजों पर दे कर बताएं कि किस कलाकार ने कहाँ कहाँ काम किया है। 3. नागराज का अचानक से नियति के प्रति व्यवहार बदलने का कारण स्पष्ट नहीं किया गया। 4. देवी अपने ही भक्तो का सर्वनाश करने वाले दुष्ट खलनायक की मदद के लिए भला नौका क्यों भेजिगी ये समझ से बाहर है ? 5. नरक नाशक और विषप्रिय की लड़ाई को काफी बढ़ा चढ़ा कर पेश किया गया था लेकिन निकला कुछ भी नहीं। 6. कॉमिक्स के अंत में नए चरित्रों को लाने से कॉमिक्स की कहानी में कमज़ोरी आती दिख रही है। कुलमिलाकर एक अच्छा प्रयास था जिसमे मुख्य नायक अभिषेक -शादाब द्वारा कॉमिक्स के बेहतरीन रंग प्रभाव साबित हुए ।
sachin dubey
Saturday, 25 October 2014
This comic is absolutely a good one by RC team. This comic is good in artwork and story . I was expecting NAAGPASHA instead of ANUBIS.Eagerly waiting for NARAK AAHUTI.
Anjani Dubey
Thursday, 23 October 2014
Nice one. Good story & Fine Artwork. I must Congratulate the Writer mr. Nitin Mishra & The Artwork Team. Intense story with Great Artwork. This is the Third issue of Origin series & Next one will be the last of this Origin series. Eagerly waiting for the next Part. I gave story 4 Star, It deserves better but there are room for betterment. Story is intense, we see both Teenage "Raj" & Adult "Nagraj" in two separate stories running side by side, Few secrets revealed in this issue & few other left for the next one. I gave the Artwork 4.5 as I think that this artwork team (Penciler- Hemant Kumar, Inker- Vinod Kumar & Jagdish Kumar and the Colorist: Shadab Siddiqui & Abhishek Singh) is reaching a new height & setting a benchmark for forthcoming comics. Pencilling, detailing of Characters & Environments are near perfect, effects are also good. Every picture in the issue was eye catching. Thanks for giving us a wonderful work. Cheers... Keep up the good work & Happy Diwaly to everyone.
Saumik Karak
Wednesday, 22 October 2014
G... Just finished reading Narak Dansh. Finished all three parts again and must say this is the coolest way to celebrate this Diwali. A super cool super nice origin story of any superhero. Must read for all comics readers. -Swapnil Doga Dubey-
Swapnil Dubey
Wednesday, 22 October 2014
good story... good to see something different from the original and loved vishpriya's comeback in a different role too.....i hope visarpi too makes a grand entry ...really waiting foir her dhamakedaar entry in our naraknashak's life
Gaurav Jain
Tuesday, 21 October 2014
series ke sab se dhamaakedaar comics nagraj ke treeeshrpeeeur sarpat se ladaaeee dekhkar maza aa gaya ur shnker shanshah ki story bhee mast thee ur old villen ko dkhkar maza aa gaya
manoj
Tuesday, 21 October 2014
this series going better and better after each part. narakdansh is just carry forward what narak niyati started, so many fights are there, and shankar shahenshah is there with his new powers, panchnaag are there in human form doing noble cause. so many things with the suspance why naraknashak behaving odd in end. like it love it, as i am not dat comic lover who just read comics for criticize, i just love comics they make me feel like a child again so i just love this series.
Alok Parmar
Tuesday, 21 October 2014
good comics.
aman kumar
Tuesday, 14 October 2014
A tale of origins and a build up for the finale. Narkdansh dikhata hai apko gehraai narknashak ke character ki, uska vishwaas, uska hath aur uska atoot pyaar. Apko milegi jhalkiyan uske nagshakti kii, aur insaan ki sabse badi shakti ki jisse wo har badha paar karta aya hai. Ek kshann ko khi thoda sa miss lagta hai par sarcasm aur irony se bharpoor dialog ek alag hi roop dikhaate hai teen nagraaj ka jo is duniya me dhal raha hai. Kuch khulaase aur kuch mazedaar twists jo apko khush kardenge. Chitrankaran bahit pyaare dhang se kiya hai Story: 3.8 Artwork: 4 Overall: 3.9
Ajo Koshy