SARVSANGRAM

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Printed
SARVSANGRAM
Code: SPCL-2559-H
Pages: 96
ISBN: 9789332422735
Language: Hindi
Colors: Four
Author: Nitin Mishra
Penciler: Sushant Panda
Inker: Vinod Kumar
Colorist: Pradeep Sehrawat, Abhishek Singh
Paper: Glossy
Condition: Fresh
Price: Printed
Rs. 120.00
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Description सर्वसंग्राम #2559 सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग के सभी महानायक अपनी जान पर खेल कर मानवता पर मंडरा रहे भयानक खतरे से जूझ रहे हैं! उनके युग लगे हैं दांव पे! शुरू हो चुकी है खूनी प्रतिस्पर्धाएं! जो जीतेगा उसका ही युग ब्रह्मांड में अस्तित्व में रहेगा, जो हारेगा उसका युग हमेशा के लिए मिटा दिया जाएगा!, रक्षक ही लड़ रहे हैं रक्षक से! इन खूनी लड़ाइयों के विजेता ही बचा पाएंगे अपने लोगों और अपने युग को! अति रोमांचक, रोचक और अनोखा होगा ‘एक युद्ध- एक युग’ नामक देवताओं का रचा यह रहस्यमयी महारण!
Paperback Comics/Books that are parts of same Series
Collector Editions that are parts of same Series

Reviews

Thursday, 23 October 2014
Story is going in right direction. Artwork is much better than the previous comics in this series.
NAYAN HAZARIKA
Friday, 03 October 2014
G... I purchased both CE n' paperback edition of this comics because of this cover page. Both edition looks awesome. I was eagerly waiting to read this comics and now I am finally at home... I just finished reading it. I was so much interested in Anthony vs Dracula, but this fight is in parts and didn't go well :/ HELL Yeah, Parmanu fighting Parmanu was great... I knew Parmanu gonna win and he won. Congratulations to Prachanda too for proving that is he is a worthy Hero. That was so inspiring. 'Saccha mahabali kehlaaye wahi jo jeete apne man ka antardwand.' Mahamanav vs Haru... whi whi whi... this is gonna be EPIC! but what disappointed me was Shakti vs Tilismdev. Fight was small and I was expecting a lot lot lot more from that. And Tilissmdev almost won... Shakti came back in her human form. NO!!! I wanted to see Shakti's victory. But it's K. If story will go on per my expectations, not even a single Pracheen Kaal hero will win :D Adig is now becoming one of my fav hero but I always want to see Doga vs Adig. Let's see if that happens in future. This time artwork is even more perfect. Some pages are really Amazing. ALL THE BEST TIRANGA for his fight... -Swapnil Doga Dubey-
Swapnil Dubey
Thursday, 02 October 2014
It is another great comic by RC and one of the best in the Sarvnayak series. Hope the future parts will also continue the same.
Ahtasham
Wednesday, 01 October 2014
सर्वनायक श्रृंखला का प्रस्तुत तृतीय खंड अपने पहले आये खंडो की तुलना में सर्वथा अधिक रोचक भी दिखाई दे रहा है और गहरा भी! सर्वदमन के अंत तक आप जान चुके थे..कि युगम द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में परमाणु और प्रचंडा बराबरी पर थे! इस भाग में उनके इस द्वन्द का फैसला तो होता ही है तथापि कहानी में अभूतपूर्व घटनाचक्र भी दृष्टिगोचर हुए हैं! आइये जानते हैं कि इस किताब में क्या गूड बातें छिपी हुयी हैं! ‪#‎प्रस्तावना‬:अनश्वरेश्वर यह शुरुआती 9 पन्नों में है...जो बिलकुल ही अलग कालखंडो में दर्शाई कुछ जटिल घटनाओं की सिर्फ सूचना मात्र तक सीमित हिस्से हैं! द्वापरयुग में घूमता इतिहास ,वर्तमान में गगन,विनाशदूत और ग्रहणों,और 5099 का बूढा ध्रुविष्य अपनी बेटी के साथ चंडकाल से लड़ते नजर आते हैं! कोई डिटेल लेखक नहीं देते इसलिए ये पन्ने कोई ख़ास टिप्पणी योग्य नहीं है! ‪#‎प्रथम_अध्याय‬ : आत्मशत्रु (काल रण) कहानी पढने का सबसे मुख्य कारण है यह जानना कि परमाणु और प्रचंडा के बीच आखिर जीत किसकी होती है! यहाँ पर देखना दिलचस्प था कि आखिर लेखक किस तरह से इन दोनों को बराबर रख पाते हैं! और इस बारे में हम लेखक को पूरे अंक देते हैं कि वो सभी को संतुष्ट करने में सफल रहे हैं! परमाणु और प्रचंडा अपने आखिरी पड़ाव में जिस तरह से जूझे और सिर्फ 19-20 के अंतर से इस द्वन्द का विजेता सामने आया! यह सिर्फ लड़ाई ना होकर जिस तरह से पुराने घटनाक्रमों के साथ जुडी परिस्थितियां सामने रखते हुए सब कुछ दिखाया जा रहा है, इसको देखते हुए इस पूरे भाग का लेखन प्रशंषा के योग्य है! लेकिन प्रचंडा के अतीत का हिस्सा अभी भी पूरी तरह से खुला नहीं है! हमें इंतज़ार रहेगा कि लेखक उसको पूरी तरह से सामने लायें! ‪#‎तिलिस्मदेव‬ : शक्ति बड़ी अनजानी है...सपना है, सच है, कहानी है...देखो ये पगली...बिल्कुल ना बदली..यह तो वही दीवानी(महक ) है ‪#‎शक्ति‬- अक्कड़ बक्कड़ बम्बे बो..80-90 पूरे सौ सौ जन्मों का प्रण जो लूँ...तिलिस्मदेव हो उड़न छु तिलिस्मदेव और शक्ति के मध्य हुआ द्वन्द अपितु काफी छोटा था..लेकिन सम्पूर्ण कहा जा सकता है! हमें एक आशंका पहले थी कि जिन पाठको को पूर्व काल के नायको के बारे में जानकारी नहीं है..कहीं उनको कहानी समझने में दिक्कत आ सकती है..लेकिन लेखक ने जिस तरह से पुरानी घटनाओं को दोबारा से स्मरण करते हुए यह प्रतियोगिता दिखाई है..वो अद्भुत सोच का परिणाम है! कौन सोच सकता था कि लेखक चंदा के जीवन के स्याह हिस्से को युगों पुराने तिलिस्मदेव के अतीत से जोड़ देंगे! लेकिन यह करके लेखक ने अपनी उच्च कल्पनाशीलता का परिचय दिया है! हमने यह भाग बहुत पसंद किया है! तिलिस्मदेव और शक्ति के बीच की लड़ाई पर हमारी टिप्पणी यही है कि ये पाठको को कुछ हद तक एक तरफ़ा लग सकती है! जहाँ एक पक्ष ने अपना पूरा पराक्रम दिखाया ही नहीं..और मुकाबला बेमेल सा नज़र आने लगा! पर जिस "पेनल्टी" की बात युगम इसके अंत में करता है..वो शायद आगे प्रतियोगिता का भाग्य बदल दे! अब अगला द्वन्द है शुक्राल और तिरंगा के बीच ! ‪#‎शुक्राल‬: मैं खिलाडी तू अनाड़ी ‪#‎तिरंगा‬ : तू कबाड़ी मैं जुगाड़ी एक बड़ा पाठक वर्ग मानकर चल रहा है कि यह एक बेमेल मुकाबला होने वाला है जिसमे तिरंगा के जीतने के चांस सिर्फ 10 % हैं! हम भी इस सोच से अलग नहीं हैं! और वैसे भी जिस तरह से शुरू के इन 2 द्वंदों का परिणाम आया है..यह भविष्यवाणी बहुत आसान है कि अगला विजेता कौन होने वाला है! परन्तु लेखक इसको किस तरह से पूरी तरह औचित्यपूर्वक दर्शाते हैं..आगे यह देखना दिलचस्प रहेगा! तो अब तक आपने जान लिया है कि कहानी के मुख्य बिंदु क्या थे...इनके अलावा कुछ अन्य छोटे हिस्से भी चल रहे हैं...जिसमे एक में नया किरदार "नरकपुत्र रक्ष" जुड़ने वाला है! इसको लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता है..क्यूंकि यह एक ऐसा किरदार लग रहा है..जो आत्मघाती भी हो सकता है! भीमकाय अडिग के बाद यह दूसरा किरदार इस श्रृंखला की खोज कहा जा सकता है! फिलहाल इसकी सिर्फ एक झलक देखने को मिलती है! असुरलोक में शम्भुक और शुक्राचार्य कुछ नया गुल खिलाने में चक्कर में हैं..लेकिन महामानव के हिस्से को अभी भी अबूझ पहेली बनाकर रखा गया है! ‪#‎सुपर‬ कमांडो ध्रुव : कहानी में ध्रुव अभी तक सारी बागडोर खुद संभाले हुए है...और उसकी सूझबूझ से ही पश्चात काल आगे है...वो अपने सह प्रति द्वंदी शुक्राल और संचालक युगम के हर पैंतरे को विफल करता जा रहा है! लेकिन यह देखना और दिलचस्प होगा कि शुक्राल के सामने तिरंगा को उतारने का उसका निर्णय इस बार किस करवट बैठता है...जिससे ध्रुव अपने आपको किसी भी आक्षेप से बचा सके! ‪#‎समयकाल_की_अनभिज्ञता‬ : सर्वनायक में एक चीज़ जिस पर पाठक अभी ध्यान नहीं दे रहे हैं वो है समयकालो की जानकारी की कमी! यह प्रश्न अभी उत्तर नहीं खोज पाया है कि आखिर तीनो युगों में चल रहा यह सबकुछ एक साथ ही क्यूँ घटित हो रहा है? युगम जो कर रहा है वो एक अलग मसला हो सकता है..लेकिन 1- इतिहास का अचानक से एकाएक भूतकाल में पहुँच जाना! 2- महामानव जिस समय काल में है उसका उल्लेख ना होना! 3- हरुओं के बारे वो जानकारी जो कभी वर्तमान के किसी नायक को नहीं रही..उसके बारे में गगन और विनाशदूत को पहले से पता होना! 4- हरूओ की सृष्टि देव और असुर से अलग है! वो उन नियमो को नहीं मानती..जो यह दोनों मानती हैं! कोहराम में आया हरु भी सिर्फ एक उर्जा का रूप था..जिसने मानव का शरीर धारण किया था! वो चाहता तो किसी दूसरे पदार्थ से अपना शरीर बना लेता! खैर महामानव के सामने जो हरु दर्शाए गए हैं..वो भी मानव रूप में हैं! या तो यह एक गलती है...या फिर वो मानव कौन थे जिनके शरीर पर हरूओ का कब्ज़ा है..यह लेखक को बताना चाहिए! 5- पेज 66 पर जो महाखलनायको का जमावड़ा लगा हुआ है..उसका समय काल भी नहीं लिखा गया है! त्रिफना सीरीज के बाद हो रही यह घटना वर्तमान में हुई घटना से पहले कब की है यह बताने के साथ साथ यह भी बताया जाना जरूरी था..कि शाकूरा,सपेरा,मिस किलर,वामन,चुम्बा,ध्वनिराज आदि असंख्य विलेन जो या तो कहीं कैद थे..या अपने ग्रहों पर चले गए थे! एक साथ कैसे कहानी में टपका दिए जा रहे हैं!आखिर हम इन सभी घटनाओं को किस तरह से आपस में जोड़े कि वो पहले आई कहानियों से मेल खा सकें? 6 - अंत में महारावण कहता है कि वो वर्तमान पर कब्ज़ा करने आया है! लेकिन यह निर्णय और जानकारी उसको कैसे हो सकती है कि वर्तमान आखिर है क्या? क्यूंकि महारावण के लिए वर्तमान वो है जिसमे उसने जन्म लिया था..यानी की द्वापर युग! अगर वो कालदूत के समय में अब लड़ने आया है तो यह उसके लिए भविष्य है ना की वर्तमान! 7- एक और अच्छा सवाल है..कि यह मान लिया कि महक का प्रेम युगों युगों से चला आ रहा है और कभी सफलता नहीं पा सका...यह भी सही है कि तिलिस्मदेव अमर हैं...तो अगर लेखक का कथन यह है कि चंदा ही महक का पुनर्जनम् है..तो इसका मतलब यही हुआ कि तिलिस्मदेव भी वर्तमान में जरूर कहीं ना कहीं जीवित होंगे! लेखक ने वर्तमान में मौजूद तिलिस्मदेव को क्यूँ उजागर नहीं किया है! युगांधर से लेकर अब तक की कहानी में सिर्फ सवाल ही सवाल हैं...और उत्तर देने में कोई प्रोग्रेस नहीं हुई है! इसको हम आलोचना तो नहीं कहेंगे..लेकिन सर्वनायक प्रतियोगिता के अतिरिक्त दूसरी तरफ की सभी कहानियों में जो कुछ भी दिखाया जा रहा है या जाता रहेगा...वो उलझाऊ होने के साथ-साथ मूल कहानी से जुड़ा प्रतीत होने के बाद भी जुड़ा नहीं लग रहा है! हम एक छोटा सा सवाल और करते हैं..कि सर्वनायक प्रतियोगिता में युगम ने सिर्फ कुछ ख़ास नायको को क्यूँ चुना और बाकी को क्यूँ नहीं चुना? आईपीएल की तर्ज़ पर खेलकूद प्रतियोगिता जो चल रही है वो हमें भी पता है कहानी का मुख्य केंद्र नहीं है...जिस दिन यह प्रतियोगिता ख़त्म हो जायेगी..उसी दिन दूसरी घटनाओं में जो अबूझ पहेलियाँ हैं..वो सतह पर आकर नए प्रश्न खड़े कर देंगी! खैर सवाल तो हर भाग में 10 नए बन रहे हैं! अगर लेखक कहानी में साथ ही साथ छोटी छोटी बातों में कुछ के उत्तर भी देते जाएं..तो कहानी ज्यादा मजबूत लगने लगेगी! एक और तार्किक प्रश्न ने जन्म लिया हमारे दिमाग ने...कि अब तो यह कहानी युगांधर से अब तक 4th पार्ट में आ चुकी है...लेकिन क्या किसी ने ध्यान दिया कि हमारे सभी जोशीले सुपर हीरोज़ ने अब तक इतनी लड़ाइयाँ और कसरत कर ली है...लेकिन युगम ने किसी को पानी तक नहीं पूछा...मतलब कम से कम खाने को ही कुछ दे देता...बेचारे भूखे पेट ही लगातार लडे जा रहे हैं.....इस विषय को ख़त्म करने के लिए एक "सर्व लंगर " का भी आयोजन लेखक को करना चाहिए! ‪#‎आर्टवर्क‬ - सर्व संग्राम में पिछले भागो कि तुलना में मन को मोह लेने वाला आर्टवर्क है...सुशांत जी और विनोद कुमार जी ने साथ में एक बेहतरीन काम देकर वापस श्रृंखला को जीवंत कर दिया है! अपितु फिर भी यहाँ उतार चड़ाव मौजूद हैं...35वे पन्ने के बाद आर्ट में गिरावट देखने को मिलती है..फिर 50 वे पन्ने से 65 तक वापस पटरी पर आती है...लेकिन 66वे से वापस डूब जाती है....73वे से अंत तक आर्ट वैसा नहीं रहता जैसा शुरुआत में था! खैर बीच-बीच में दूसरे आर्टिस्ट्स द्वारा बनाये गए पन्ने बहुत आकर्षक बने हैं! रंग संयोजन भी ठीक ठाक है! सिर्फ सुशांत जी थोडा और समय लगाकर पूरी किताब में एक जैसा ही चित्रांकन बनाये रखें ! अंत में कॉमिक्स का मनोरंजनात्मक पक्ष : ‪#‎हास्य_पक्ष‬: वैसे यह कहानी हास्य बोध के लिए नहीं है..लेकिन लेखक ने अपनी तरफ से बीच बीच में कई जगह हास्य का पुट दिया है..युगम जब पेज 44 पर अपने फिल्मों के प्रति प्रेम का प्रदर्शन करता है..तो उसपर परमाणु का कटाक्ष ठहाके लगाने को मजबूर कर देता है! ऐसे ही युगम द्वारा शुक्राल के ऊपर अवधि को लेकर किये कटाक्ष पर शुक्राल का झेंप जाना और आर्टिस्ट द्वारा दोनों के भावो का सुंदर चित्रण मजेदार है! ऐसे कई दूसरे पल भी कहानी की सुन्दरता बढाते हैं! #सर्व_संग्राम में आपको सबसे अधिक मज़ा आर्टवर्क देखने में ही आएगा! इसका तात्पर्य यह नहीं है कि इससे बेहतर नहीं मिल सकेगा...बल्कि यह है कि पहले से आपको बेहतर काम मिला है..इस बात कि ख़ुशी आप महसूस कर सकेंगे! कहानी के बारे में हमारा यही कहना है कि यह महा श्रृंखला जरूर है..लेकिन अपने मूल से अभी भी अलग है..कोई भी कहानी एक तरफ से शुरू होती है..और एक दूसरी तरफ जाकर खत्म हो जाती है! यह कहानी अब तक ना तो शुरू हुई है और ना जल्दी ख़त्म होने वाली है! इसमें हो यह रहा है..कि अलग अलग समय में हो रही घटनाओ को एक साथ जोड़कर दिखाया गया है! कहानी वर्तमान में चलती है..और बाकी दोनों काल उसके साथ जुड़ते हैं! यहाँ किसी तरह का कोई नियम मौजूद नहीं है! जैसे चाहे कहानी को चलाया जा रहा है! पाठको को ख़ुशी यह है कि उन्हें सालो बाद अपने-अपने प्रिय पात्र दोबारा से देखने को मिल रहे हैं! अगर वो एक बार उन पात्रो की आखिरी कहानी और अब दोबारा दिखाई जा रही कहानी के बीच लिंक जोड़ना शुरू करें तो उनके लिए भी हितकर होगा और श्रृंखला के लिए भी! कहा जाता है कि कहानी को पढने में दिमाग नहीं लगाना चाहिए! बिलकुल सही बात है...कोई भी कॉमिक्स मनोरंजन के लिए पढ़ी जाती है! लेकिन सर्वनायक जैसी कोई भी विस्तृत कहानी को लिखना भी हंसी खेल नहीं है..लेखक ने बहुत मेहनत से इस कहानी को सोचा और लिखा है..उनके प्रयास को पूरा आदर दिया जाना चाहिए! अगर वो आप पाठको के लिए इतना दिमाग लगाकर गूड से गूड तथ्यों पर बारीकी से काम कर सकते हैं..तो उन्ही तथ्यों को आप लोग भी अपने अपने स्तर पर जांचकर संतुष्ट जरूर हों..क्यूंकि यही वक़्त है जब आप चीज़ें बता सकते है,उनपर ध्यान दिला सकते हैं...जो कहानी का अंत आते आते सुलझाई जा सकती हैं. बाकी के प्रश्न-उत्तर तो आगे भी चलते रहेंगे! फिलहाल इस कहानी का लुत्फ़ उठाइये!
YOUDHVEER SINGH
Wednesday, 01 October 2014
Kahani ka level bahut hi romanchak ho chuka hai. Is series ne sach me dhoom macha di hai. Is comic me artwork bhi pichli sab ke mukable jordar hai. Mixing bahut hi achhe se ki gayi hai. Effects aur bhi shandar hain. Comic me alag alag bhag ko alag alag artists ne banaya hai. Bahut achha mishran hai. Shakti aur Tilismdev ki takkar jordar lagi sath hi Anthony ki wapasi. Ab agli comic Sarvsanhaar ka wait karna mushkil hai.
Rahul Bhandari
Sunday, 28 September 2014
mindblowing and awesome i wish a movie is made on this series i just simply can't control my enthusiasm .hats off to the writes this and the nagayan are the best series ever
shivansh sinha
Thursday, 25 September 2014
Mostly people have a craze for foreign comic books and characters BUT I request Indians to at least give this series a try. I think you'll realize how talented our indigenous writers & illustrators are. What an adventure this series is!! Seriously mindblowing and it was as if I was watching a movie. Beautiful artwork and of course an explosive story line. Some of my favourite lines are "Hamara samay aur apna budhapa, ye nibandh padhkar barbad mat karo Gurudev!" SCD "Tumhare saath yehi problem hai Dhvaniraj, jab bhi milte ho, science padhane lag jaate ho." Princess Mehak "Uff! Yeh kya ho gaya hai hame! Kyun pratipal hamare hridai me uss nikrisht Nagdev ka vichar aata hai?" Tilismdev "Apne sampoorn tapobal va tiliism gyaan ke bavajood main kabhi ye nahi jaan saka ki mere aahvaan par Devta bhi aane ko baadhya kyun ho jaate hain.." There are many more but I can't write all of them here. So, I'm eagerly awaiting the fourth part of this series. I think if Raj comics play their cards right then almost all the heroes mentioned in this series can have strong, individual story lines. Would love Tilismdev's story in detail, as an independent series. I'm so, so proud of Indian comics right now and thank God I never left reading Raj comics.... :-) :-)
Madhuparna Bose
Tuesday, 23 September 2014
Bahut dino ke baad koi aisi comics aai jise maine kai baar padhe .Lekin mujhe Prachanda aur Tilismdev ka haarna thik nai laga kyoki mujhe Prachanda har tarah se Parmanu se better laga aur jaha tak maine Shakti ke bare me padha hai uske paas kewal fire power hai not the every power of Adi Shakti or Devi KALI,Other than this almost everything is good.
PITAMBER RAM
Sunday, 21 September 2014
Good Story & better artwork if compared to early release of the series. Vinod ji takes his responsibility very seriously. I just didn't feel well how Tilismdev lost the fight to Shakti. Why would Shakti be so angry on him? The author should keep relevancy on Superheroes' emotions. (Spoiler) Tilismdev didn't do anything wrong in his current life. Neither he disturbed the lady in earlier ones. Whatever, sarvnayak series rocks.
Gaurav Tiwari
Thursday, 18 September 2014
artwork not upto mark. Please improvise it so that it can keep as a memorable item.
RAJEEV RANJAN
Wednesday, 17 September 2014
sarvdaman k baad iskabada intejar tha muze lekin maine jis cheez ki aasha ki thi ye waisi nahi nikali. story bahut jhol lag raha hai muze qki muze lag raha hai ki sabhi purane charactor ko isme thusa jaa raha hai. sarvnayak competion , aadig vs vistrut br. rakshak , drculla vs anthony , dhruvishya ,maharavan ko ek hi comics may represent karne k chakker may nitin sir sirf iss cmics may sarvnayak pratiyogeeta aur adig wali fight may hi focus kr paye hai jkoi muze bahut kharab laga qki sarvdaman may anthony vs drecula jo start hua tha to muze laga ki iss comics may atleast kuch to achha dikhayenga uski fight ko bt iss baar bhi 2 hi page mile . kahane ka ye mtlab hai ki jb 2-2 hi page may dikhaana hai to dikha hi q rahe ho... artwork iss baar previous part se better hai but still its need to be improove.. waiting for the next one q ki jis reason se may isse buy kr raha hu wo hai sarvnayak pratiyogita next tiranga vs shukraal hai iska muze is liye wait rahenga qki is baar fight super power heroes may nahi balki normal hero may ho rahi hai.
shubham nanet
Tuesday, 16 September 2014
story plot is good.........parmanu aur prachanda ki ladai bahut achi thi aur saath hi jiss tarah se dikhaya gaya hai woh acha tha........uske baad tilismdev aur shakti ki ladai ki start achi hoti hai but bahut jaldbaaji mein usse khatam kiya gaya hai......halanki jiss tarah se khatam huyi hai woh ladayi woh thik hai but kahin na kahin thoda kamjoor padti hai........comics ka plus point yahi dono ladaiyan hai........baaki jitni bhi kahaaniyan pure comics mein chali hai woh kamjor hai aur just time pass lagti hai.....aisha lagta hai kahin na kahin ki comics ko jaanbhujh kar thoda kicha ja raha hai.......anthony aur dracula ki ladai mein koi dum nahin hai.......vinaasdoot aur gagan ki upastithi bhi kuch khaas nahin hai.........dhruva ka bhavisya mein ladna,etc utni prabhavit nahin karti.....pralay se purva ek acha adhyay hai but uske dialouges comedy ki tarah lagte hai,,,,,,,itni bade comics ke standard mein bilkul nahin jamte iss tarah ke dialouges..........dhruva aur nagraj ki saare villains ki ladai average hai.........tiranga aur shukraal ki ladai start hone waali hai aur ek interest bhi bana hua hai........but phir bhi comics jitni prabhavshaali ban sakti thi utni nahin ban payi...........adig ki ladai ko bhi bahut hi ache dhang se dikhaya nahin gaya hai........story ke side plot ne main story ko weak banaya hai.........story is good.......artwork is good....artwork kahin kahin bahut hi acha hai.......but puri comics mein ek tarah ka artwork nahin hai.........khaaskar kar nagraj aur dhruva ki jo ladai saare villains ke saath hoti hai uski artwork average hai.......but phir bhi pichle do parts ke comparision mein isme sudhaar hua hai.......artwork is good......prachanda and tilismdev is very good.......shakti and parmanu is good......nagraj and dhruva is average......good comicssss.........
amrit kumar
Monday, 15 September 2014
Sarvasangram! rc ab apni abilities mein itni confident ho chuki hai ki ab to apni marzi se classic comics aur series produce kar rahi hai. ye sarvanayak series bhi aisi hi hai, absolutelt amazing. is se pehle kam hi comics ka scale itna large hua hoga. ye series to nagayan tak to takkar de sakti hai. jabse ye series shuru hui hai isne sabke hosh uda diye hai. the best part is that it is still improving, iska matlab ye ki sarvasangram isse pehle vale part se kahin behter hai. it has really exceeded all expectations. Story - agar kam se kam shabdon mein kaha jaaye to is comics ki story kamal hai, bus kamal hai. aisa koi bhi rc ka character nahi jo isme na ho. chahe hero ho ya villain, a grade ho ya b grade, naya ho ya purana sab ke sab ismein hai. aur sabka apna ek well defined part hai. kai baar aisa hota hai ki multistarrers mein kai superheroes ko pages hi nahi milte and more often than not nagraj aur dhruva sara credit le jaate hain. par is comics mein aisa bilkul nahi hai. har character ka role damdaar hai. it can even be compared to the film The Avengers. ab jara story specifics ki baat karte hain. parmanu aur prachanda ki fight bahut achhe dhang se khatam ki gayi. is kahani mein anasheshwara ka naya concept diya gaya jo ki bahut acha laga. aur bhi kai chir parichit chehre aapko dekhne ko milenge jinko dekhkar aapka man khush ho jayega. itne saare scenarios ke ek saath chalne se ho sakta hai ki aapko do ya teen baar ye comix padhni pade but trust me its part of the fun. vaise to iss kahani ko maine 5 stars diye hain par phir bhi kuch kamiyan jaroor hai. halanki ye is mein kahani ki tareef karni hogi kyunki pehli baar mujhe kamiyan dhundhni padti hai varna to kamiyan apne aap hi mil jaati hai. pehli baat to ye ki shakti aur tilismdeva ki fight mein utna maja nahi aaya jitni aana chahiye tha. jahan parmanu aur prachanda ki ladai variety aur high points se bharpur thi vahan tilismdeva aur shakti ki fight predcictable aur straight foreward thi. kafi improvement ho sakti thi. baaki mujhe sirf is baat ki chinta hai ki kahin is kahani ka bhi vahi haal na ho jo iti kand ke saath hua tha. rc better provide us with a good ending. last baat ye ki swarg ke liye jo devtaon aur asuron mein sangram chal raha tha uska kya hua? Artwork - is kahani ka artwork vaisa hi tha jaisa ki rc ke artwork usually hota hai. inconsistent is the best way to describe it. halanki is baar ka artwork pichli vali se badhiya tha. colouring mein definite improvement hai. pehle ke mukable kahin jyada grand aur chatkeela hai. sarvasangram jaise kisi mukable mein jaisa hona chahiye bilkul vaisa. inking bhi almost up to the mark hai. bas penciling ke mamle mein sushant ji se thodi kahin kahin chuk ho gayi. but it is still pretty good. aur jis tarah se ye series improvement kar rahi hai vaise i know that artwork in sarvasanhar will bw even better. Overall - this is one of the finest comics i have ever read. rc is at the top of its game. koi agar comics na padhta ho ya use bachon ki cheez samajhta ho to use ye comics jaroor padhaein. eagerly waiting for the next part. keep it up rc!
kunal bharati
Sunday, 14 September 2014
Sarvsangram sarvnayak Amazing. ....
shrey pandey
Saturday, 13 September 2014
Only a few months before the Sarvanayak series was launched I read the cross-over series between DC and Marvel comics which was released a few years ago and I thought there is no way something like this can be done in India with Raj Comics being the only major comic publisher in the country but then they came up with something that completely blew my mind and they didn't even need another publisher to compete with. Their competition is with themselves and the Sarvanayak series is in fact much better that DC-Marvel cross over in terms of story - thanks to Mr. Nitin Mishra who recently has become my favorite story teller with Mr. Anupam Sinha not being very active these days. I am reading RC since mid 1980s and have not seen a series which is as huge and as unpredictable as this one. The same applies to Sarvasangram as well. Although the Shakti-Tilismdev angle was kind of predictable after the story by Yugam it was still one of the best things in this comic. I always felt that Parmanu never got the place in the RC world that he deserved but this series has given him a great story. It has great action, nice humor, emotions and suspense in proper doses with nothing being too much or too less. Hopefully this will remain the same and the end of the series won't be disappointing. Thanks to RC for listening to us and improving the artwork which makes this amazing experience even better. I just have two small complaints 1.I'm missing Nagina who I believe is the best Nagraj villain. In fact as per me she is the shrewdest, meanest, most menacing, most ruthless and most unethical villain in the whole RC universe and I sincerely hope she gets introduced in the story sooner or later. 2. I don't think only 96 pages per comic book do justice to this epic. Yet the comic gets a perfect 5 from me for its story. Eagerly waiting for the next one.
rishoosingh
Friday, 12 September 2014
सबसे पहले राज कॉमिक्स को तहे दिल से धन्यवाद की इस वृहद् श्रृंखला को आपने चित्रकार सुशांत-विनोद जी को सौंपा क्यूंकि चित्रांकन में अभूतपूर्व सुधार हुआ है और glossy अच्छे पेपर पर प्रदीप-अभिषेक जी के दृश्य प्रभाव और रंग इतने सुन्दर और बेहतरीन उभर कर आये हैं मानो जैसे आपके हाथो में कोई हॉलीवुड एनीमेशन फिल्म चल रही हो. 1.नितिन जी ने क्या खूबसूरती से राज कॉमिक्स के संसार के पुराने खो चुके किरदारों(अच्छे-बुरे)दोनों को 1990,1991,1992 आदि सालो से चुनकर कितनी सुन्दरता से उन्हें इस महाकाव्य में पिरोया है|मतलब `बुगाकू' की वापसी, क्या बात है ! 2.कॉमिक्स में नितिन जी ने शुक्राल जैसा अपनी गति खो चुके राज कॉमिक्स किरदार को भी अपने लेखन से नयी ऊर्जा से भर कर उसे ऐसा रणनीतिकार बनाया है जिसके प्रति कम से कम मैं तो बहुत उत्साहित हूँ| 3.राज कॉमिक्स में तिलिस्मदेव की कोई उत्पत्ति कथा नहीं थी लेकिन ये कॉमिक्स नितिन जी द्वारा तिलिस्मदेव की उत्पत्ति कथा भी है और भावपूर्ण हैं|तिलिस्मदेव आपका मन जीत लेंगे| 4.कॉमिक्स में तिलिस्मदेव के माध्यम से बेहद मजबूती से दिखाया गया है कि नारीशक्ति तभी आगे बढती है जब पुरुष स्वयं पीछे हटकर उसे आगे बढ़ने का मौका देंते हैं|जिस प्रकार लोककल्याण और मासूमो की रक्षा हेतु तिलिस्मदेव जानबूझकर हारे,उन्होंने हमारी आत्मा जीत ली इसके उलट शक्ति पुरुषो से नफरत और कुंठा से भरी एक स्वार्थी औरत लगी जिसे न लोककल्याण की फ़िक्र है और न मासूमो की जिंदगी की परवाह उसे बस पुरुषो से नफरत करना ही आता है| 5.नितिन जी ने कॉमेडी और हास्य पर काफी जोर दिया है जैसे युगम का कहना कि तुम मानवों ने बहुत कम अच्छी चीज़े बनायीं हैं, उनमे से एक है फिल्मे और ध्वनिराज का चुम्बा को हटाने को कहना वाकई कॉमेडी से भरे दृश्य हैं| वाकई इस कॉमिक्स की कहानी, चित्रांकन(सुशांत जी का काम बेहतरीन है) और इसके रंग-दृश्य प्रभाव बेहद उच्चस्तरीय और गज़ब के हैं| 9/10.धन्यवाद राज कॉमिक्स.
sachin dubey
Friday, 12 September 2014
story & artwork is amazing best comics of this series
manoj
Thursday, 11 September 2014
Jabardast hai SARVANAYAK series......but artwork me sudhar chahiye...do-char pages me bohot bakwas artwork kiya gaya hai...par sabse jyada khusi is baat ki huyi ki inking VINOD ji ka hai...thank u RC for that....asha hai aage vi SARVANAYAK series me VINOD ji ka hi inking dekhne ko milega....and NITIN ji thank u too for your excellent work....keep it up.....
Tridib Deka
Thursday, 11 September 2014
First of all i would like to say thanks to RC For receiving my order within 4 days. REALLY A OUTSTANDING STORY AND THIS TIME ALSO IMPROVE IN ARTWORK.various parts comes in this comic.but it maintains its stability..This new techniques of writing comics is really awesome.bcoz now all comics comes in series and this gives most excitement to read .well done RC.keep it up.paisa bosul comics
RUPAM KALITA
Thursday, 11 September 2014
This comic is in every way the bestseller material. Combination of amazing story with best Artwork! This comic is unique and unpredictible. Print quality gets better with every set.
AyushGupta
Tuesday, 09 September 2014
सर्वनायक सीरीज का ये चौथा भाग है कहानी एक साथ अलग अलग जगहों पर आगे बाद रही है कहानी का मुख्य क्षेत्र है युग्म क्षेत्र, जहाँ दोनों दोनों युगों के महानायकों में अपने युग को बचाने के लिए प्रतियोगिता चल रही है, जहाँ परमाणु - प्रचंडा और तिलिस्मदेव - शक्ति की प्रतियोगिता पूरी हो चुकी है अगली प्रतियोगिता तिरंगा और शुक्राल के बीच होना है जो अगले भाग (सर्वसंहार) में दिखाई जाएगी, दूसरी तरफ किरिगी और पंचनाग सेना मिलकर अडिग से टक्कर ले रहे हैं, अभी तक अडिग सब पर भारी पड़ रहा है, वही एक अज्ञात क्षेत्र में महामानव भी मौजूद है, सर्वसंग्राम में कुछ नयी घटनायें जुडी हैं गगन और विनाशदूत की एंट्री हुई है, महारावण, चण्डकाल, नागपाशा गुरुदेव, थोडांगा, ध्वनिराज, बोना वामन, चुम्बा, मिस किलर, जादूगर शकुरा, तूतनखामेन, सपेरा, बुगाकु नागपाशा गुरुदेव सुपरविलेन भी इस युद्धः में शामिल हो चुके हैं, नागपाशा और सुपर विलेन की धुर्व नागराज के साथ अच्छी लड़ाई दिखाई है हालाँकि इस लड़ाई को बहुत कम पेजों में जगह मिली है हो सकता है अगले भाग में इसे और भी अच्छी दिखाया जाए. भविष्य की एक घटना में धुर्विशया को चण्डकाल से मुक़ाबला करते हुए दिखाया है, एक और महारावण और महात्मा कालदूत में टकराव हो रहा है, दूसरी तरफ एंथोनी और प्रेत अंकल मिलकर ड्रैकुला और सघम से टक्कर ले रहे और बोर्डेलो ( बोर्डेलो को पहले कोलाहल कॉमिक्स में देखा चुके हैं) भी ड्रैकुला के साथ है. कहानी जिस तरह से आगे बाद रही है उससे लगता है अभी इसमें आगे और भी कई घटनाये जुड़ेंगी अब अगले भाग का इंतज़ार है. आर्टवर्क कही अच्छा है, कही बहुत अच्छा और कही बस ठीक ही है. मेरी रेटिंग स्टोरी 4.5 आर्टवर्क 4.5
Shahab Khan
Tuesday, 09 September 2014
समीक्षा - सर्वसंग्राम 'युगांधर’ एवं ‘सर्वयुगम’ में पाषाण राक्षसों के हमले की एक छोटी सी घटना ने ‘सर्वदमन’ में एक बड़े और ‘सर्वसंग्राम’ में एक विशाल घटना का रूप ले लिया है। इस कहानी का क्षेत्र इतना विस्तृत हो गया है कि आंखें फटी की फटी और सोच आकाश की ऊंचाई को पार कर गई है। भूतकाल और वर्तमान काल के संगम तो इसमें हो ही रहा था अब इस कहानी में भविष्यकाल ने भी दस्तक दे दी है। क्या मानव, क्या दानव, क्या देवता, क्या दैत्य और क्या परग्रही। एक-एक कर जिस तरह इस कहानी का हिस्सा बनते जा रहे हैं वो पढ़ने वालों का रोमांच उतनी तेजी से बढ़ता चला जाता है। सर्वसंग्राम की कहानी वहीं से शुरू होती है जहां सर्वदमन समाप्त हुई थी। कहानी का मुख्य आकर्षण युगम क्षेत्र में चल रही प्रतिस्पर्धा में परमाणु और प्रचंडा का अतिंम मुकाबला शुरू होता है। इस पूरी कहानी में यह खास बात रही है कि हर मुकाबले में कुछ ऐसा नयापन दिखाई दे जाता है जो मुकाबले को और रोमांचकारी बना देता है। इसमें भी परमाणु और प्रचंडा के व्यक्तिगत पहुलओं के बारे में काफी कुछ जानने को मिला। प्रचंडा की कहानी को एक नया मोड़ देने की कोशिश की गई है। बस देखने वाली बात यह होगी की क्या जो नया मोड़ दिया गया है उसको आगे बताया जाएगा या सिर्फ इसी काॅमिक्स तक सीमित रह जाएगा। परमाणु की बात करें परमाणु की काॅमिक्स हम बचपन से पढ़ते आ रहे हैं पर उसके बारे में इतनी गहनता से कभी सोचने का मौका नहीं मिला जैसा इसमें दिखाया गया। उसकी रिवाॅल्वर काॅमिक्स में हुई घटनाओं को इसमें ऐसे रोचक ढंग से उकेरा गया है रिवाॅल्वर जैसी क्लासिक काॅमिक्स की महत्वता को और बढ़ा दिया है। पहला मुकाबला समाप्त हुआ और दूसरा शुरू हुआ तिलिस्मदेव और शक्ति का........यह पार्ट इस काॅमिक्स का सबसे बेहतरीन पार्ट लगा मुझे हालांकि परमाणु और प्रचण्डा के मुकाबले जितना लम्बा नहीं रहा परन्तु बहुत ही रोमांचक था और उससे भी ज्यादा रोमांचक थी इस मुकाबले की कहानी........ मुझे बहुत अच्छा लगा कि तिलिस्मदेव की वास्तविक कहानी के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई और तिलिस्मदेव की जो पहली काॅमिक्स की मूल कहानी थी उसी को आगे बढ़ाया गया और कहानी को इतने बेहतरीन तरीके से लिखा गया है जिसका कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता। पर इसका पूर्ण मज़ा तभी मिलेगा जब आपने तिलिस्मदेव की पहली काॅमिक्स पढ़ रखी हो। तिलिस्मदेव राज काॅमिक्स के किरदारों में मुझे सबसे निम्न स्तर का लगता था परन्तु इस काॅमिक्स के बाद उसका किरदार कुछ ऐसा बन गया है जिसमें मुझे वो मजा आया जो भोकाल की काॅमिक्स पढ़कर आता है। दूसरा मुकाबला भी इसी खंड में समाप्त हो गया और तीसरा आरम्भ होने की कगार पर है। युगम क्षेत्र से हटकर अगर इस कहानी का बाकी घटनाओं को अगर देखा जाए तो सबको कुछ ही पन्ने मिले हैं परन्तु देखने वाली बात यह है कि एक साथ कई घटनाएं चल रही है कुछ के बारे में सर्वदमन में पढ़ चुके हैं कई और की शुरूआत इसमें दिखाई गई है। कहानी का स्वरूप इतना विशाल हो चुका है कि 96-96 पृष्ठों में समा नहीं पा रहा है। मसलन पिछले पार्ट में दिखाए अनुसार आसाम के जंगलों वाले घटनाक्रम को इस काॅमिक्स में एक पेज की भी जगह नहीं मिली। यह सोच का विषय है। हर पार्ट में दिखाए जा रहे हर घटनाक्रम को दिखाया जाना चाहिए नहीं तो कड़ी कहीं न कहीं छूटी हुई सी लगती है। इरी की गुफा में चल रहे एंथोनी वाले घटनाक्रम को भी ज्यादा पृष्ठ नहीं मिले दो शुरू में और दो अंत में। कुछ नए घटनाक्रम शुरू हुए जिसमें से कुछ राज काॅमिक्स ने अपने पेज पर दिखाए थे जैसे महारावण, दैत्यराज शंभुक का आगमन इसके अलावा कहानी में और नए किरदार आ चुके है जिसको पढ़ने के लिए पाठक उत्सुक होंगे गगन-विनाशदूत, ग्रहणो, हरू, ध्रुविष्य, चंडकाल, नागपाशा इत्यादि भी अपने-अपने अंदाज में अपना-अपना अलग षड्यंत्र रच रहे हैं। अन्य किरदारों में परमाणु के विलन, बुगाकु, सपेरा इत्यादि को देखकर अच्छा लगा। कुछ काॅमेडी के पंच भी अच्छे हैं जिनको पढ़कर हंसी छूट जाती है। सबसे अच्छा मुझे चुम्बा वाला लगा। कुछ घटनाएं मुझे अधूरी सी लगी जैसे महारावण और कालदूत आपस में अचानक कैसे लड़ने लगे पूरा घटनाक्रम नहीं बताया गया। गगन-विनाशदूत के बीच हुई बातचीत से भी लगा कि कुछ घटनाक्रम घटित हुआ है जिसके बारे में विस्तृत रूप से दिखाया जाना चाहिए था। आर्टवर्क की बात करें तो अपने पिछले पार्ट्स की अपेक्षा बहुत ही उम्दा आर्टवर्क निकल कर आया है परन्तु फिर भी बीच-बीच में कुछ एक पेजों पर बहुत ही निम्न स्तर का आर्टवर्क है जैसे किसी प्रोफेशनल ने नहीं बच्चे ने बनाया हो। नागपाशा और गुरूदेव तो बहुत ही बेकार लग रहे हैं। आर्टवर्क में एक खासियत यह है कि कुछ अलग-अलग आर्टिस्टों ने बनाया है जिसको हर अध्याय के आरम्भ में दिखाया गया है। इस लिए आर्टवर्क में वैरायटी भी देखने को मिलेगी। एक और बात मुझे पर्सनली पांडा जी का ध्रुव कई जगहों पर बहुत अच्छा लगा अनुपम जी के बाद अब जाकर कोई अच्छा ध्रुव का फेस देखने को मिला है। इसका एक कारण शायद विनोद जी की इंकिग भी हो सकती है। कुछ एक जगह खराब भी है, अगर थोड़ी और मेहनत करें तो ध्रुव के लिए राज काॅमिक्स को एक और अच्छा आर्टिस्ट बन मिल सकता है। एक जगह पर आर्टवर्क के फ्रेम में काॅपी पेस्ट वाला मैथड अपनाया गया है यानि एक फ्रेम के आर्टवर्क को थोड़े चेंज के साथ दूसरे फ्रेम में डाल दो जो मुझे बहुत खराब लगा, ऐसा नहीं होना चाहिए। कुल मिलाकर कहानी हर पार्ट के साथ रोचक होती जा रही है और अगले पार्ट के लिए स्वतः उत्सुकता बढ़ रही है। मेरी तरफ से सर्वसंग्राम को पूरे नम्बर।
Mukesh Gupta
Tuesday, 09 September 2014
YEH SARVNAYAK SERIES KI AB TAK KI BEST COMICS HAI KOHRAM AUR ZALZALLA KE BAAD BEST MULTISTARAR COMICS WAIT FOR SARVSANGRAM ZALDI AANI CHAHIYE YE COMICS
Gurdeep singh
Monday, 08 September 2014
'Anareshwar iti asyah' Sarvsangram ki prati jab padhna shuru kiya, to do pal ko laga pata nahi ye kaha le gaye story ko. Par har khand ko padha aur maza aane laga. Kuch cheeze vakratul ke baahar hai par likhne ke tareeke se pata chalta hai ki ye sab ek hi chakravyuh ke hisse hai. Kahaani manthan si hai aur kaafi cheezo aur characters aur backstories ko include karti hai. Writing me scene kafi change hue aur ek live story dikhaya gaya hai. Har roop har vaktavya ka bhaar sambhaala gaya hai. Shakti se jyada dimaag evam teamwork ki value bataayi gayi. Range of characters itne complex hai ki darr sa lagta hai ki kuch miss na ho jaae kahi. Ye ek bade jaal ko chota hissa buna gaya hai. Artwork kuch pages me achi ho sakti thi par overall me pehle se bahut better ki gayi hai. Waiting for #Sarvasanhaar next..
Ajo Koshy
Monday, 08 September 2014
maine itne sare characters ek sath padhne me bahut maja aa raha he aur aage bhi ayega. mai sarvnayak series ke sath hun.
anup
Monday, 08 September 2014
Maha multistarer comics. srvnayak series har comics ke sath shandar hoti ja rahi he.
rohitlal
Monday, 08 September 2014
Nitin ji ne sarvnayak series ki ek aur best comics di. aise hi achhi comics likhe jao.
amit singh
Monday, 08 September 2014
abhi tak ki poori series bahut badhiya lagi. is comics me to bahut sare naye vilins aaye. unka presentation bahut acha laga anashvareswar mast the. artwork bahut dhansu hai. sarvsanhar jaldi lana.
yashpal
Sunday, 07 September 2014
Finally a great artwork comparing to previous parts and excitement is building up. However there are lots of stuffs going on at the same time with only a slight glimpse of each and its getting a bit confusing.
Anshuman Singh
Sunday, 07 September 2014
Iss comic ko yugo yugo tak YAAD RAKHA jayega kyunki Yeh series hai hi ITNI special. SABHI superheroes ek saath jo dekhne ko mil rahe hai. Yeh ek aur super hit series hai NAGAYAN ke baad joki Nitin sir dwara rachit hai.Aur UPAR se ISKA CE format MAZA aur badha deta hai. NAGAYAN ke baad Yeh meri doosri pasandida series hai .
Anjani Dubey